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मौसी और अकटारा को चोदा – देसी कहानी

सीनियर सिटिजन के लंड का दम


मुझे उस दिन उस बूढ़े ने पूरी रात इतना चोदा कि चूत का भोसड़ा बन गया था.

फिर मैं जब उससे चुद कर वापस अपने घर आई तो मेरी चूत की आग शांत होने की जगह और भड़क गई थी. अब मुझे रोज चुदवाने का मन होने लगा था. उस बुड्डे ने मेरी सेक्स की आग को भड़का दिया था. अब मैं सोचती थी कि मुझे कोई रोज ही चोदे.

दो दिन बाद ही मुझे मेरे कॉंप्लेक्स के केयर टेकर की याद आई. वो भी एक उम्रदराज 65 साल के मजबूत काठी के सीनियर सिटीजन आदमी हैं. वो हमारे कॉंप्लेक्स के छत पर बने हुए एक बड़े से हॉल जैसे रूम में रहते हैं. ये हॉल कॉंप्लेक्स के सब लोगों के वेस्ट सामान को रखने के लिए बना है. ये एक बहुत बड़ा रूम है, सो उसका आधा भाग साफ करके वो केयर टेकर उसमें ही रहते हैं.

मेरा फ्लैट सबसे ऊपर की फ्लोर पर है. उस फ्लोर के बाकी के 3 फ्लैट बंद हैं, सो मेरे फ्लोर पे सिर्फ़ मैं हूँ.. और उसके ऊपर छत है. आपको मालूम ही है कि मैं भी अपने फ्लैट में अकेली ही रहती हूँ और रोज अपने कपड़े सुखाने ऊपर छत पर जाती हूँ.

मैंने उनको कई बार सिर्फ़ तौलिया में भी देखा है उनकी उम्र ज्यादा है लेकिन आज भी उनकी बॉडी फिट है.. उनके पूरी छाती पर सफेद घुंघराले बाल हैं.

अब जब मैंने एक बुड्डे की चुदाई की ताकत को महसूस कर लिया था तो मुझे विचार आया क्यों ना मैं इनको पटा लूँ. इससे मुझे रोज चुदाई का सुख भी मिलेगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा.

वो अंकल रात में दस बजे ऊपर आकर सो जाते थे. मेरी फ्लोर पर सीढ़ी के पास छत से नीचे आने के लिए एक ग्रिल का दरवाजा लगा है, वो लॉक करने से कोई ऊपर नहीं आ सकता था.

मैंने अब प्लान बनाना शुरू किया कि कैसे उनको पटाऊं. आज सुबह मैं जब कपड़े सूखने डालने के लिए गई तो मैंने जानबूझ कर एकदम शॉर्ट और स्लीवलैस टॉप.. खुला सा करके पहना, जिससे मेरी ब्रा साइड से दिखे.. और नीचे घुटनों तक आने वाला बरमूडा ही पहना था. चूंकि धोने के कारण कपड़े भीगे ही रहते थे, तो मैं ऊपर गीले कपड़े ही पहन कर चली गई. ताकि मेरे इन कपड़ों से उनको टॉप से ही मेरी ब्रा दिखती रहे.

इसी के साथ ही मैंने मेरी उतरी हुई ब्रा पेंटी, धीरे धीरे सब उनके रूम के दरवाजे के सामने ही लगी रस्सी पे सूखने डाल दीं.. जिसे वो देख सकें.
वो नहा कर ऊपर ही बैठे थे. मैं भी उनको तिरछी नज़र से देखती जा रही थी. जब मैं उनकी तरफ देखती.. तो वो सिर घुमा कर नज़र बदल देते थे. मतलब वो मुझे देख रहे थे.

ऐसा खेल मैंने एक दो दिन चालू रखा. अब वो भी अपना अंडरवियर बनियान सब रस्सी पे ही सुखाते थे.

एक दिन मैंने जानबूझ कर रस्सी तोड़ दी, जिससे मेरे कपड़ों के साथ उनके कपड़े भी नीचे गिरे. छत में धूल की वजह से कपड़े थोड़े गंदे हो गए.. चूंकि भीगे कपड़े थे.
मैं जानबूझ कर एकदम से बोली- उहह … ये भी अभी ही होना था.
मैंने सीधा उनकी ओर देखा और बोला- अंकल ये रस्सी टूट गई है.. प्लीज़ इसे फिर से बाँधने में मेरी मदद कीजिए.

वो लुंगी में ही थे, उन्होंने ऊपर कुछ नहीं पहना हुआ था.

अंकल बाहर आए तो मैंने बोला- आपके भी कपड़े खराब हो गए. मैं नीचे जाके वापस धोकर लाती हूँ और सुखा दूँगी.
फिर उन्होंने मुझे मदद की और हम दोनों ने मिल कर डोरी बाँध दी.

मैं फिर से सब कपड़े साफ करके वापस ऊपर आई. उनके अंडरवियर बनियान के साथ ही मैंने अपनी ब्रा पेंटी बगल में ही लटका कर सूखने टांग दी. ये उन्होंने भी देखा कि मैंने उनके अंडरवियर के लंड वाली जगह पर अपनी पेंटी डाली और बनियान के ऊपर अपनी ब्रा लटका दी.

इसके बाद मैंने देखा कि उनकी लुंगी एकदम तंबू बनी हुई थी. मैं एकदम से अपनी पीठ में हाथ को लेजा कर बोली- उहह.. कोई कीड़े ने काट लिया है.

ये कह कर मैं सीधा दौड़ कर छत पर एक कोने में बने बाथरूम में चली गई. ये बाथरूम का यूज वे अंकल ही करते हैं. मैं उसमें गई, उस बाथरूम का दरवाजा किसी वजह से पूरा बंद नहीं होता था, आधा खुला सा ही रहता था.

मैंने जानबूझ के अपना टॉप उतार दिया. मेरी चीख सुनकर अब तक वो भी बाथरूम तक आ गए थे और बाथरूम के बाहर खड़े होकर मुझे देखने लगे.


उन्होंने मुझे सिर्फ़ ब्रा में देखा और आवाज लगाकर पूछा- क्या हुआ?
मैंने बोला- अरे अंकल कोई चींटी मेरे अन्दर घुस गई थी.. शायद उसने ही काटा है मुझे.

ऐसा बोलते हुए मैंने देखा कि वो दरवाजे के बाहर खड़े थे. वो बाथरूम में अन्दर आ गए और उन्होंने मुझे कसकर अपनी बांहों में लिया.

मैं एकदम से नाटक करते हुए कहने लगी- अरे क्या कर रहे आप?
तो उन्होंने बोला- कब से देखता आ रहा हूँ तुम्हारी हरकतें.. चुदवाना है तो सीधे बोल ना.

उन्होंने मुझे अपनी छाती में भींचते हुए दबा लिया. मुझे एकदम राहत सी मिल गई. उनकी बड़ी सी छाती ने मुझे पूरा समा लिया था. मैंने भी कोई विरोध या ज़ोर नहीं लगाया तो वो समझ गए.
मैं अपनी स्वीकृति जैसी देते हुए उनकी बांहों में झूल गई.
अंकल ने मुझे चूम लिया और बोला- ठीक है मैं समझ गया.. लेकिन अभी नहीं.. अभी कोई देख लेगा.
यह कह कर उन्होंने मुझे छोड़ दिया. मैंने भी जल्दी से अपने टॉप को पहना और बाहर आ गई.

उन्होंने मुझसे सीधे बोला- कब चुदवाओगी?
मैंने भी खुल कर कह दिया बोला- आज रात में.. आप मेरे घर में आ जाना.
वो बोले- नहीं.. मैं घर में नहीं आऊंगा.. तुमको ऊपर आना होगा.
मैंने सर हां में हिला दिया.

मैं उनके रूम में देखने चली गई कि व्यवस्था क्या है. मैंने देखा उन्होंने आगे का हिस्सा साफ करके एक खटिया बिछा रखी थी. वे कमरे के एक कोने में अपनी रसोई बनाते थे.

मैंने बोला- एक काम कीजिए ना अंकल.. ये कपबोर्ड तो पुराने हैं इनको बिछा लीजिएगा. इधर बेडरूम जैसा सैट करके उस पर वहां गद्दे बिछा दीजिएगा.
उन्होंने मुझसे बोला- क्यों खटिया में मज़ा नहीं आएगा क्या?
ये कह कर अंकल ने मुझे किस कर लिया.
मैंने बोला- ठीक है आज खटिया में ही सही.. फिर ठीक नहीं लगेगा तो कल देखेंगे.


यह कह कर मैं नीचे आ गई, मुझे पूरा दिन उनका लंड ही दिख रहा था. मैं लंड के ही इंतजार में थी कि कब रात हो और मुझे मेरा लंड मिले.

मेरा टाइम कट नहीं रहा था, मैंने रात में नहा कर एकदम से अपनी चुत को क्रीम से बाल निकाल कर चिकनी बना ली. फिर मैंने ब्लैक कलर की फैंसी वाली ब्रा पेंटी, जिसमें बॉर्डर पर केसरिया कलर की डोरी लगी थी.. पहन के तैयार हुई. ब्रा पेंटी के ऊपर लाइट पिंक नाइटी पहन कर रेडी हो गई.
अभी रात 9 ही बजे थे. मुझे मालूम था कि वो ठीक दस बजे आएँगे. दस बज गए, लेकिन वो नहीं दिखे. मैं लंड के लिए बेताब हुई जा रही थी.

वो ठीक सवा दस बजे ऊपर आए. मैं दरवाजे पे ही खड़ी थी. मैं उनके लिए एकदम देसी घी का ड्राइ फ्रूट डाल कर गर्म गर्म दूध बना के तैयार थी.
जैसे ही अंकल ऊपर गए मैं दूध का गिलास लेकर पीछे से ऊपर आ गई. उन्होंने मुझे देखा, मैंने उनको धीरे से पूछा कि वो ग्रिल को लॉक कर दिया?
उन्होंने बोला- हां कर दिया.

वे अपने कमरे की तरफ बढ़ गए.

मैं उनके पीछे आ गई, रूम में जाते ही उन्होंने खटिया के ऊपर एक उनकी सफ़ेद रंग की लुंगी डाल ली.

मैंने बोला- पहले ये दूध पी लीजिए.. देसी घी में बनाया है.
वो बोले- ओह.. तुम खुद पिलाओ.
मैंने उनको अपने हाथ से उन्हें दूध पिलाया.

फिर उन्होंने बोला- तुम रुको.. मैं 5 मिनट में नहा कर आता हूँ.
वो तौलिया लेकर बाथरूम गए.

मैं खटिया के ऊपर बैठी थी. इतने में वो सिर्फ़ तौलिया में ही आ गए और रूम का दरवाजा लॉक कर लिया. अब वो भी खटिया पर बैठ गए और मुझे कसके अपनी बांहों में ले लिया. मैं भी उनको किस करने लगी, उन्होंने धीरे धीरे मेरी नाइटी के ऊपर से मेरे चूचे दबाना शुरू किए.
उन्होंने अब मुझसे बोला- मेरी बीवी 25 साल पहले मर गई थी, तब से आज मैंने पहली बार किसी औरत को छुआ है.

ये कह कर अंकल ने अपना तौलिया खोल दिया.

बाप रे.. उनका लंड इतना लंबा और मोटा था या लौकी थी. ये देख कर मुझे अन्दर ही अन्दर खुशी होने लगी.

उन्होंने मेरी नाइटी खोली, फिर ब्रा उतार कर मेरे मम्मों को बारी बारी से मुँह में लेना शुरू कर दिया. मैंने अपने दूध अपने हाथों से दबा के बारी बारी से उनको चुसवाने लगी.
कुछ देर दूध चूसने के बाद अंकल ने मेरी पेंटी खोली और उसमें उनकी एक उंगली डाल दी. मेरी चुत इतने में ही एकदम गीली हो गई थी.
वो बोले- अरे तू तो एकदम तैयार है जानेमन..
यह कह कर अंकल ने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने लंड पे रखा और कहा- इसे मुँह में ले लो.


मैंने धीरे से नीचे बैठ गई. अंकल ने खटिया के किनारे पैर फैला लिए. इससे उनका लंड बांस सा उठ गया. मैंने झट से उनका लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी.

करीब 15 मिनट में तो उनका लंड एकदम लोहे जैसा कड़क हो गया. चचा गरम हो गए.. तो उन्होंने मुझे खटिया पे लिटाया और बन्दर सी फुर्ती दिखाते हुए वो मेरे ऊपर चढ़ गए. अंकल ने अपना तना हुआ लंड मेरी चुत के मुँह पर टिका दिया.

मैंने अपने हाथ से लंड को पकड़ कर पहले अपनी चुत की फांकों में रगड़ा.. फिर उसे चुत के छेद पर रख कर उनको बोली- अब अन्दर डाल दीजिए.
उन्होंने पूछा- क्या डाल दूँ?
मैंने लंड को हिला कर कहा- इस मोटे लंड को मेरी चूत में पेल दो.

अंकल ने मेरे मुँह से लंड डालने की सुना तो एकदम से ठोकर मार दी.

अंकल के लंड का सुपारा बहुत ही मोटा था. चूत में जाने में थोड़ा दर्द हो रहा था. मैं थोड़ी सी चीखी.. फिर उन्होंने रुक कर थोड़ी देर ऐसे ही रहने दिया.
मैं शांत सी हुई तो अंकल ने एकदम से एक ज़ोरदार झटका मार के लंड अन्दर डाल दिया. मैं मचल गई और मेरे मुँह से दर्द भरी आवाज निकली- कितना गया?
उन्होंने बोला- अभी आधा गया.
मैं डर गई कि अभी आधे में तो चुत की माँ चुद गई.. पूरा घुसेगा तो क्या गांड में से निकल आएगा.

अंकल थोड़ी देर रुके.. फिर एक ज़ोर के झटके में उन्होंने अपना पूरा लंड अन्दर पेल दिया. मेरी साँस अटक गई.. और आँखों की पुतलियां फ़ैल गईं. कुछ पल रुकने के बाद अंकल ने धीरे धीरे ऊपर नीचे होना शुरू किया. जैसे ही वो ऊपर नीचे होते.. उनकी खटिया से चें पें की आवाज़ आ रही थी.
मैं बोली- ये टूट तो नहीं जाएगी?
उन्होंने बोला- नहीं, ये नहीं टूटेगी जानेमन.. तेरी चुत ज़रूर आज फट जाएगी. ऐसा लगता है, तेरे पति ने तुझे चोदा ही नहीं है. बड़ी कसी सी चूत है तेरी.

अब मैं भी उनकी कमर पे पीठ पे हाथ से सहलाए जा रही थी.. साथ ही उनको किस करती जा रही थी. अब तो वो ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहे थे. मुझे भी खूब मज़ा आ रहा था. मैं जिन्दगी में पहली बार खटिया पे चुदवा रही थी. खटिया की आवाज़ खूब हो रही थी.. ऐसा संगीत चुदाई के साथ बड़ा सुकून दे रही थी.

अंकल ने 20-25 मिनट तक मुझे चोदा. अब तक मैं दो बार झड़ चुकी थी. तभी अंकल ने एकदम तेज चुदाई शुरू कर दी थी और वे बोले- अब मेरा निकलने वाला है.

मैं कुछ कहती तभी एक जोरदार गर्म सैलाब सा मेरी चुत में निकल गया. मेरी चूत उनके पानी से भर गई. वो सीधा मेरे ऊपर ही लेट गए. उनका लंड मेरी चुत में फंसा हुआ था. दो मिनट में ही मुझे महसूस हुआ कि नीचे मेरी चुत से मेरा रस और उनका वीर्य बह रहा था. उनकी लुंगी और गद्दा.. जो खटिया पर बिछा था.. उसमें ही रस निकला जा रहा था.

कुछ देर बाद मैंने उनका लंड बाहर निकाल कर अपने मुँह से चाट कर साफ किया. फिर हम दोनों नंगे ही छत पर बने बाथरूम में जाकर मैंने अपनी चुत और उनका लंड पानी से साफ कर दिया.

फिर हम वापस आकर खटिया से वो गीली लुंगी हटा कर फिर से चिपक कर एक दूसरे को बांहों में दबा कर लेट गए. दस मिनट बाद मैंने धीरे धीरे उनकी छाती पे क़िस करना शुरू कर दिया. वो चूमते हुए बोले- अभी मन नहीं भरा क्या.. चलो ठीक है एक बार और चोद देता हूँ!

बस हम दोनों ने फिर से चुदाई का खेल शुरू कर दिया.
उस पूरी रात में अंकल ने मुझे 5 बार चोदा. मैं सुबह में 6 बजे नीचे आकर सो गई.. और सीधा एक बजे उठी.

अब तो मैं रोज ही ऊपर चली जाती हूँ और पूरी रात में वो सीनियर सिटीजन मुझे 2 या 3 बार तो चोदते ही हैं.

अगली कहानी के लिए इंतजार कीजिएगा.. जल्दी ही भेजूँगी.

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