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मौसी और अकटारा को चोदा – देसी कहानी

भाभी की गीली चूत ने मेरे लंड को पागल कर दिया


मेरा नाम दीपक (बदला हुआ नाम) है. ये सेक्स कहानी बिल्कुल सच्ची है. मैं सीवान बिहार से हूं और दिखने में बहुत हैंडसम हूं. मैं थोड़ा शर्मिला टाइप का लड़का हूं. मुझे लड़कियों से बात करने में बहुत शर्म आती है. इसीलिए अभी तक मैंने किसी लड़की को अपनी गर्लफ्रेंड नहीं बना पाया है. मैं सिंगल हूं. ये हिंदी भाभी सेक्स कहानी मेरी और एक भाभी की चुदाई की है. ये भाभी मुझे एक शादी में मिली थीं.

हुआ यूं कि मैं अपने एक दोस्त रिजवान की शादी में गोपालगंज गया था. वहां मेरे स्कूल टाइम के काफी सारे दोस्त आए थे. उनमें एक दोस्त राहुल भी था, जो साला शुरू से ही बहुत बड़ा लौंडियाबाज था. उस पर हर टाइम चुदाई का भूत सवार रहता था.

राहुल ने वहां एक भाभी को देख लिया. उन्होंने ब्लैक कलर की ड्रेस पहन रखी थी. सच में भाभी बड़ी मस्त माल लग रही थीं. वो भाभी वाकयी बहुत सुंदर थीं. उनका फिगर भी बड़ा लाजवाब था.

हालांकि मुझे उस वक्त तक भाभी के फिगर के साइज का नहीं पता था, लेकिन उनका फिगर परफेक्ट था. जो भी आदमी भाभी को एक बार देख भर ले, उसका लंड एक झटके में खड़ा नहीं हो, तो वो मादरचोद नपुंसक ही होगा.

शादी में सारे मर्द भाभी कि तरफ ही देख रहे थे.

राहुल ने सबसे बोला कि आज वो उस भाभी को पटा कर ही जाएगा.

हम सभी में होड़ लग गई कि देखो भाभी को कौन सैट करता है.

मैं तो इस मामले में सबसे पीछे रहने वाला था, इसलिए मैं कुछ नहीं बोला.

मगर मेरा दिल भी भाभी कि जवानी पाने के लिए मचल गया था.

सब लौंडे भाभी को पटाने में लग गए.

मैं एक कोने में जाकर बैठ कर सबको देखने लगा.

सब भाभी को पटाने में लग गए. किसी न किसी बहाने से उनके पास जाते और उनसे बात करने की कोशिश करते.

पर भाभी किसी को भी भाव नहीं दे रही थीं. सब हार के आकर मेरे पास बैठ गए.

राहुल मुझसे बोला- तू भी कोशिश करके देख ले.

मैंने उससे बोला- नहीं, मैं ऐसे ही ठीक हूं.

मैं और बोल भी क्या सकता था, मेरी तो वैसे भी लड़कियों से फटती थी. लेकिन भाभी को देख कर मेरी अन्दर की भी वासना जाग गई थी.

खैर … शादी खत्म हुई और सब धीरे धीरे जाने लगे.

मेरे सारे दोस्त भी चले गए, पर मुझे रिज़वान ने रोक रखा था.

फिर कुछ देर के बाद रिज़वान के अब्बू आए और मुझसे बोले- बेटा तुम सीवान जा रहे हो, तो आयत को भी लेते जाओ. इनका घर भी रास्ते में पड़ता है.

मैं आयत नाम सुनकर थोड़ा सोचने लगा कि आयत किस का नाम है.

तभी वो भाभी सामने आ गईं मतलब आयत और कोई नहीं, बल्कि भाभी का ही नाम था.

मेरी तो लॉटरी लग गई थी. मैंने चाचा को बोला- आप फिक्र ना करें, मैं इन्हें ड्रॉप कर दूंगा.

कुछ देर बाद मैं और भाभी निकल पड़े. कुछ दूर तो सब शांत था, फिर भाभी ने मेरा नाम पूछा … तो मैंने बता दिया.

मैंने उनका नाम पूछा.

हालांकि मुझे तो उनका नाम पहले से ही पता था लेकिन बात जारी रखने के लिए मैंने पूछ लिया.

उन्होंने अपना आयत बताया और हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे.

धीरे धीरे हम एक दूसरे से सहज हो गए.

मैंने भाभी से पूछा- आपके घर में कौन कौन रहता है?

उन्होंने बताया कि मेरे शौहर दुबई में रहते हैं. मेरा एक दो साल का बच्चा है.

मैं भाभी से बोला- आप बहुत खूबसूरत हो … आपके पति आपको छोड़ कर वहां अकेले कैसे रह लेते हैं?

उन्होंने हल्की सी स्माइल के साथ थैंक्स बोला और कहा- आप भी बहुत हैंडसम हो.

मैंने भी भाभी को थैंक्स बोला.

फिर भाभी ने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?

मैंने ना में सिर हिलाया.

भाभी को यकीन ही नहीं हुआ कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.

उन्होंने फिर पूछा- तुम मुझे बता सकते हो … मैं किसी से भी नहीं कहूंगी.

मैं बोला- सच में मेरी कोई जीएफ नहीं है.

भाभी बोलीं- क्यों नहीं बनाई जीफ!

मैंने कहा कि मुझे लड़कियों से बात करने में बहुत शर्म आती है.

भाभी हंसने लगीं और बोलीं- क्या लड़कियां खा जाएगी तुम्हें?

मैं कुछ नहीं बोला.

फिर भाभी बोलीं- अच्छा ये बताओ … तुम्हें कैसी लड़की पसंद है?

मैंने झट से बोल दिया- आपके जैसी.

भाभी मेरी बात से शर्मा गईं और बोलीं- अच्छा … इतनी अच्छी हूं मैं!

तो मैंने बोला- हां आप बहुत सुंदर हो. शादी में मेरे सारे दोस्त आपको लाइन मार रहे थे. पर आपने ही किसी को भाव नहीं दिया.

भाभी बोलीं- मुझे पता है, सब लाइन मारने की कोशिश कर रहे थे. मुझे अच्छा भी लग रहा था.

फिर कुछ टाइम के बाद उनका घर आ गया.

भाभी ने बोला- आना कभी मेरे घर.

मैंने हां कहा और चल दिया.

कुछ दिन तक मैं अपने कामों में व्यस्त रहा.

फिर एक दिन मुझे किसी काम से गोपालगंज जाना था तो मैं गाड़ी लेकर निकल गया.

मैं गोपालगंज दो बजे दोपहर के टाइम पर पहुंच गया था. मैंने जल्दी से सारा काम निपटाया और घर जाने लगा.

अचानक रास्ते मैं बारिश शुरू हो गई. शाम का टाइम होने के वजह से घर जाना भी सही नहीं था.

तभी मुझे भाभी का ख्याल आया. उनका घर ज्यादा दूरी पर नहीं था, तो मैं उनके घर की तरफ निकल पड़ा.

मैंने भाभी के घर जाकर बेल बजाई.

तो भाभी बाहर आईं. मुझे देख कर भाभी बोलीं- अरे तुम … इतने दिनों बाद कैसे याद आ गई मेरी?

मैंने भाभी को सब बताया.

उन्होंने कहा- कोई बात नहीं, आज आप यहीं रुक जाओ.

मैंने कहा- ठीक है.

फिर भाभी मेरे लिए एक तौलिया लाईं और बोलीं- तुम भीग गए हो, इससे पौंछ लो.

मैं तौलिया लेकर खुद को पौंछने लगा और भाभी चाय लाने रसोई में चली गईं.

थोड़ी देर बाद भाभी चाय लेकर आईं.

मैंने चाय पी और हम दोनों बातें करने लगे.

भाभी ने सूट पहन रखा था. उसमें भाभी मस्त माल लग रही थीं.

उनको देख कर मेरे बाबू ने हरकत करनी शुरू कर दी और मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैं लंड को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था, पर भाभी ने देख लिया.

वो बोलीं- तुमको कोई गर्लफ्रेंड मिली कि नहीं?

मैंने ना में सिर हिलाया.

इसी तरह हमें बात करते करते रात के 8 बज गए. भाभी खाना बनाने चली गईं और मैं उनके बच्चे के साथ खेलने लगा.

बाहर अभी भी बहुत तेज़ बारिश हो रही थी.

थोड़ी देर में उनका बच्चा सो गया तो मैं भाभी को देखने लगा. उन्होंने रात के ढीले ढाले कपड़े पहन लिए थे. उनका जिस्म बड़ा सेक्सी लग रहा था.

मेरा तो लंड बेकाबू था साला बार बार खड़ा हो जा रहा था.

भाभी ने मुझे घूरते हुए देख लिया और वो थोड़ी देर में मेरे पास आकर बैठ गईं.

हम दोनों बातें करने लगे.

भाभी बोलीं- तुम मुझे ऐसे क्यों घूरते हो?

तो मैंने जवाब दिया- आप आप इतनी हॉट हो कि आपसे नजर ही नहीं हटती.

ये सुन कर भाभी शर्मा गईं और जाने लगीं.

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भाभी को पीछे से पकड़ कर उनकी गर्दन पर किस करने लगा.

भाभी को कोई अंदाज़ा नहीं था कि उनके साथ ऐसा कुछ होने वाला है.

इससे भाभी एकदम से मुझसे दूर हुईं और मुझे अपने से दूर धकेल दिया.

मैंने भाभी को फिर से पकड़ लिया और उनको बेडरूम में ले जाकर मैं भाभी को किस करने लगा. भाभी मुस्कुराती हुई मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थीं, बोल रही थी- ओह … आह … मत करो ऐसे!
पर मैं अपने काम में लगा रहा.

मैंने एक बात महसूस की कि ये चुदासी तो हैं पर कुछ झिझक रही हैं.

फिर मैंने भाभी का शर्ट उतार दिया और ब्लैक ब्रा के ऊपर से ही उनके दूध मसलने लगा. एक दूध को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

भाभी के बड़े ही मस्त रसीले मम्मे थे, एकदम परफेक्ट साइज के.

मैंने भाभी की लोअर को भी खोल दिया. उन्होंने अन्दर ब्लैक पैंटी पहन रखी थी भाभी के गोरे जिस्म पर काली पैंटी देख कर मैं और पागल हो गया और चुत को ऊपर से ही मसलने लगा.

भाभी अब भी दिखावे का विरोध कर रही थीं, पर मैं अपने काम में लगा था.

मैंने भाभी की ब्रा और पैंटी को एक झटके में फाड़ दिया. अब भाभी मेरे सामने बिल्कुल नंगी थीं, वो अपने हाथों से अपने जिस्म को ढकने की कोशिश कर रही थीं.

मैं एक हाथ से मम्मे और एक हाथ से भाभी की चुत को मसल रहा था. उनके पूरे जिस्म पर किस कर रहा था.

भाभी अब गर्म होने लगी थी. तो मैंने उनको छोड़ दिया और अपने कपड़े निकालने लगा. भाभी वैसे ही नंगी पड़ी मुझे देख रही थीं.

मैं झट से नंगा हो गया और भाभी की चूत‌ पर अपने होंठ लगा कर उनकी चूत को चाटने लगा. अब भाभी कसमसाने लगीं और आहें भरने लगीं. मैं अपनी जीभ भाभी की चूत के अन्दर डालने लगा. भाभी को देख कर ऐसा लग रहा था कि कोई उनकी चूत पहली बार चाट रहा है. मैंने दस मिनट तक उनकी चूत चाटी. इतने में भाभी की चुत का दो बार पानी निकल गया था.

फिर मैंने देर न करते हुए अपना 6 इंच का लंबा और 2.5 इंच का मोटा लंड उनकी चूत के द्वार पर रखा और एक झटके मैं आधा पेल दिया. भाभी जोर से चिल्लाने लगीं और उनकी आंखों से आंसू गिरने लगे. पर मेरे ऊपर तो जुनून सवार था. मैंने भाभी के दर्द की परवाह न करते हुए एक और जोर का झटका मारा. इस बार मेरा पूरा लंड भाभी की गर्म चूत में समा गया था. मैंने ज़ोर ज़ोर से झटके मारने जारी रखे. अब भाभी को भी मज़ा आ रहा था. वो भी सीत्कार भरने लगी थीं.

मेरा ये पहली बार था और भाभी की चूत लावा की तरह गर्म थी. इसलिए मैं 5 मिनट में ही झड़ गया. मैं भाभी की एक चूची को चूसने लगा और उनको किस करने लगा. मेरा लंड फिर से तैयार हो गया. इस बार मैंने एक झटके में ही भाभी की चूत में पूरा लंड पेल दिया. अब भाभी को दर्द नहीं हो रहा था और वो लंड के मजे ले रही थीं. इस बार भाभी अपनी गांड हिला हिला कर मेरा साथ दे रही थीं और ‘आह ऊऊह आह उह आह ..’ की आवाज निकाल रही थीं.

मैंने आधे घंटे तक भाभी की जम कर चुदाई की. इतने में भाभी 3 बार झड़ चुकी थीं. मेरे लंड का दम भी अब निकलने वाला था. मैं और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

भाभी और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगीं- आह आह हायल्ला … कितना गहरा पेल रहे हो.

उनकी ये कातिलाना आवाज मुझे और मदहोश कर रही थी.

फिर मेरी बॉडी अकड़ने लगी और मैंने अपने लंड का पानी भाभी की चूत में निकाल दिया और भाभी के साइड में गिर गया.

हम दोनों की सांसें फूल गई थीं.

मैंने भाभी से पूछा- कैसा लगा आपको?

भाभी ने कोई जवाब नहीं दिया; बस मुस्कुरा दीं.

हमने उस रात 4 बार चुदाई की. मैंने घड़ी में टाइम देखा, तो रात के 3 बज रहे थे. मैं बुरी तरह थक चुका था.

हम दोनों ऐसे ही नंगे सो गए.

सुबह मेरी आंख खुली तो 8 बज रहे थे. भाभी अब भी नंगी मेरे बगल में सोई थीं.

उनको नंगी देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने वैसे ही अपना लौड़ा भाभी की चूत पर रखा और एक जोर के झटके के साथ पूरा अन्दर पेल दिया.

भाभी एकदम से नींद से जाग गईं और मुझे दूर धकेलने लगीं, पर मैं उनके दोनों हाथ पकड़ कर उनको ताबड़तोड़ चोदने लगा.

वो ज़ोर ज़ोर से कराह रही थीं और मैं उन्हें चोदे जा रहा था.

बीस मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना पानी उनकी चूत में ही छोड़ दिया.

भाभी अब भी कराह रही थीं.

मैंने उनको चूमा और कहा- भाभी आपको भी मज़ा आया और मुझे भी … अब क्या हुआ?

पर भाभी कुछ नहीं सुन रही थीं.

कुछ देर के बाद उन्होंने कहा- तुमने मेरे साथ सेक्स किया. किसी को पता चल जाएगा … तो मैं मुँह दिखाने लायक नहीं रहूंगी.

मैं बोला- किसी को कौन बताएगा. आप निश्चिंत रहो, मैं किसी को कुछ नहीं बताने वाला.

मेरे बहुत डर समझाने के बाद भाभी शांत हो गईं.

मैं भाभी को बाथरूम में ले गया और उनकी पूरे बॉडी की सफाई की.

फिर शॉवर के नीचे भाभी को किस करने लगा.

मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं खड़े खड़े भाभी की फिर से चुदाई करने लगा.

अब भाभी भी फुल एन्जॉय कर रही थीं और मेरा पूरा साथ दे रही थीं- आह आह उह आह राजा … अह उम्म अह चोदो मुझे … और ज़ोर से … आह और ज़ोर से चोदो मेरी जान आह आह.’

भाभी की ये मदहोश कर देने वाली आवाजें मुझे मस्त कर रही थीं.

आधे घंटे की इस मस्त चुदाई के बाद हम दोनों बाथरूम से बाहर निकल आए.

मैंने कपड़े पहने और उसके बाद भाभी का मोबाइल नम्बर ले लिया.

जाते समय मैंने उनको एक किस दिया और वहां से अपने घर के लिए निकल गया.

इसके बाद मैं आज भी किसी न किसी बहाने गोपालगंज जाता रहता हूं और हम दोनों खूब चुदाई करते हैं.

हाल ही मैं भाभी के शौहर एक महीने के लिए आए थे. उनके जाने के बाद मैंने भाभी को अलग अलग तरीकों से खूब चोदा.

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