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मौसी और अकटारा को चोदा – देसी कहानी

मेरे पापा का लंड मम्मी की बेस्ट फ्रेंड रेणुका आंटी की चूत में!


हाई दोस्तों मैं वापस आया हूँ आज आप का लंड फिर से खड़ा करने के लिए. आज की कहानी मेरे पापा और मेरी माँ की खास दोस्त की चुदाई की हैं. मेरी फेमली में मैं मम्मी और पापा तिन लोग ही हैं. मेरे डेड अपने जमाने में बड़े ही हेंडसम आदमी हुआ करते थे. अभी वो काम से रिटायर्ड हैं और अपनी शांति वाली जिन्दगी को जी रहे हैं. मेरी माँ एक कम्पनी के फायनांस डिपार्टमेंट में काम करती हैं, पार्ट टाइम. मेरी माँ मेरे पापा से करीब 10-11 साल छोटी हैं वैसे.

मेरी माँ की एक कलिग हैं जिसका नाम रेणुका हैं और वो काम पे ही मिली थी माँ को. लेकिन फिर दोनों में अच्छी दोस्ती जम गई. रेणुका आंटी के बारे में आप को थोड़ा बता दूँ ताकि आप के मन में कोई और बुलबुले ना फूटे.

उम्र उसकी करीब 40 साल की होगी और हाईट 6 फिट से 1-2 इंच कम. कलर गोरा साफ़ और गांड और उभरी हुई चूचियां किसी के भी लंड को टाईट करने में माहिर सी.

दोस्ती जमी उसके बाद में आंटी अक्सर माँ के साथ और कभी कभी मामा को मिलने के लिए हमारे घर आने लगी थी. एक दिन ऐसे ही आंटी माँ के पास आई हुई थी. वो दोनों कुछ डिसकस कर रही थी, शायद काम की ही बात थी कुछ. आज कयामत लग रही थी आंटी अपनी सिल्की साडी के अंदर. मेरे लंड में भी शोले भड़क उठे थे उसका जोबन देख के.

पापा बाथरूम से नहा के आये थे और वो कपडे पहन रहे थे. मैं हॉल में बैठ के टीवी पर न्यूज देख रहा था. पापा जब हॉल में आये तो मैंने देखा की माँ की इस सहेली की हॉट बॉडी देख के आज पापा का लंड भी बेईमान सा था. माँ से नजर छिपा के वो घड़ी घड़ी रेणुका आंटी को ही देख रहे थे.

पापा की नजर उसके ऊपर हैं शायद ये आंटी को भी भनक लग गया था लेकिन उसने कुछ भी रियेक्ट नहीं किया उस वक्त. माँ से बात ख़त्म कर के आंटी चली गई. मेरे और पापा के लंड को बेताब कर के. मैंने शाम को बाथरूम में लंड पर साबुन रगड के आंटी के नाम की ही मुठ मारी.

एक हफ्ता सा बीत गया था अब. और आज फिर से रेणुका आंटी माँ को बोलने के लिए आई थी. और आज तो वो और भी धांसू माल लग रही थी अपनी स्लीवलेस चूड़ीदार में. उसके बूब्स एकदम कडक उभरे हुए लग रहे थे आज. पापा सोफे में बैठे हुए थे और माँ किचन के काम में बीजी थी क्यूंकि कामवाली ने डिच कर दिया था उसे. पापा के साथ बातें करते हुए रेणुका आंटी उनके पास ही बैठी ही.

मैं हॉल के सामने वाले कमरे के अंदर मेज पर बैठ के अपनी ऑफिस की फाइल्स में बीजी था लेकिन मेरा ध्यान आंटी के ऊपर ही था. पापा के नेचर मजाकिए होने की वजह से वो आंटी को हंसा रहे थे बात बात में.

मैंने देखा की पापा की निगाहें आज रेणुका आंटी की बगल (मस्त शेव की हुई और परफ्यूम लगाईं हुई) और कडक बूब्स के ऊपर ही थी. वैसे मेरी नजर भी आंटी की बगल पर गई थी एक दो बार. मुझे भी लेडिज की बगल चाटने की फेंटसी हैं. लेकिन इस कहानी में मेरी भावनाओं को कोई स्थान नहीं हैं!

थोड़ी देर के बाद मम्मी किचन से फ्री हुई और वो रेणुका आंटी के पास आई और दोनों बतियाने लगे. और फिर माँ उसे ले के अपने बेडरूम में चली गई.

जब आंटी उठी तो मैंने देखा की उसकी चुड़ीदार गांड की फांक में फंस गई थी और एकदम सेक्सी नजारा बना था. पापा ने आंटी की गांड देख के अपने नींद से जागे हुए लंड को हाथ का झटका दे के बैठा दिया. आंटी की नजर उसके ऊपर पड़ी तो उन्होंने स्माइल दे दी. माँ आगे चल रही थी इसलिए उसे कुछ पता नहीं चला. मैंने दोनों की ये शैतानी देख के मन ही मन हंस पड़ा.

मैं जान चुका था की पापा का लंड अब आंटी की चूत के लिए बहावरा हो चूका हैं और पापा इसकी बुर ले के ही मानेंगे. औउर फिर मैंने देखा की पापा ने अपने प्लान को अमल में ला भी दिया. मम्मी के मोबाइल से उन्होंने आंटी का नम्बर निकाला औउर पहले गुड मोर्निंग गुड इवनिंग के कुछ मेसेज भेजें.

कुछ ही समय में दोनों की चेटिंग चालु हो गई व्हाटसएप्प के ऊपर.

पहले पहले नोर्मल चेटिंग होती थी. और फिर धीरे धीरे पापा ने पर्सनल बना दिया चेटिंग को. और कुछ ही दिनों में मैंने नोटिस किया की पापा और आंटी की सेटिंग हो चली थी. और वो लोग अब गंदे जोक्स और फ़ोटोज़ भी व्हाटसएप्प चेटिंग में एक दुसरे को भेजने लगे तजे.

हफ्ता भर और बिता होगा और आंटी फिर से हमारे घर आई. मम्मी को ऑफिस जल्दी जाना था इसलिए वो घर पर नहीं थी. शायद आंटी ऐसा मौका देख के ही आई थी. मैं और डेड ही थे घर पर. पापा ने उन्हें कोफ़ी पिलाइ.

तभी पापा ने मुझे बुलाया और बोले की एक काम कर बुआ के वहां बहुत दिनों से कुछ भेजा नहीं हैं मैंने तो एक किलो मिठाई ले के दे आ.

मैंने सोचा की साला एकदम बुआ कहाँ से आई पिक्चर में. वैसे पापा ये काम खुद ही करते थे. मैं जान गया की आज आंटी की बुर गर्म कर देंगे मेरे पापा.

मैंने सोचा की चलो चला तो जाऊँगा यहाँ से लेकिन तुम दोनों की चुदाई देखूंगा जरुर. मैंने निकल गया और दो गली के बाद एक दोस्त के घर के सामने बाइक पार्क कर के वापस आ गया. घर आ के देखा तो पापा ने मेन गेट को अंदर से बंद कर दिया था. मेरे पास एक्स्ट्रा चाबी थी, तो मैंने चुपके से बिना आवाज के गेट खोला और घर में घुसा. हॉल खाली पडा था.

पापा मम्मी के बेडरूम में भी कोई नहीं था. मेरे को लगा के शायद आंटी चली गई थी और मेरा शक गलत था. तभी मुझे स्टोररूम से फुसफुसाहट सुनाई पड़ी. मेरे कान खड़े हो गए. मैंने धीरे दबे पाँव से स्टोररूम की विंडो से देखा तो पापा का मुहं आंटी की बगल में था जिसे वो चाट रहे थे कुत्ते के जैसे. और उनका लंड एकदम टाईट खड़ा हुआ था. आंटी ने ऊपर के कपडे निकाल फेंके थे. वो खुद अपने दोनों बूब्स को हाथ से मसल रही थी. जब जोर से दबाया तो दुध भी निकल गया पापा के मुहं पर ही. पापा ने अब आर्मपिट को छोड़ा और चूचियां चूसने लगे. रेणुका आंटी ने पापा का लंड अपने हाथ में ले लिया और हलाने लगी और बोली, क्या खूब औजार हैं आप का तो, बहन जी को तो मजा आ जाता होगा.

पापा ने चूची से मुहं निकाला और बोले, बहन जी का मेनोपोज हो गया हैं और लंड देख के डरती हैं अब वो.

ये सुनके रेणुका आंटी हंस पड़ी और बोली, कोई बात नहीं अब मैं आ गई हूँ ना आप की लाइफ में.

 

पापा ने अब रेणुका आंटी के बाकी के कपडे भी फेंक निकाले. और उसे वही एक पुराने सोफे पर फेंका. आंटी ने टाँगे खोली और चूत के ऊपर उंगलियाँ घुमाई. पापा बोले, खोल दो मेरी जान.

आंटी ने एक हाथ से चूत को खोला और पापा अपनी जबान ले के चल दिये चूत चाटने के काम पर. आंटी के बदन में नशा चढ़ा दिया पापा की लिकिंग ने. इधर मेरा बाबुराव भी बवाल मचाये हुए था. मैंने लंड को पेंट से निकाल के हिलाना चालू कर दिया था हलके हलके से.

अब आंटी को ऐसे मस्त चाट के दी पापा ने फिर भला वो क्यूँ न पापा का मुहं में लेती. उसने निचे बैठ के मेरे बाप का 7 इंच का लौडा अपने मुहं में दबा के चुसना चालु किया. पापा के मुहं से उदगार निकले, वाह रेणुका मेरी डार्लिंग, पूरा मुहं में ले के चुसो जान!

रेणुका आंटी चूसने की एक्सपर्ट लगी मुझे सच में. क्या मजे से पुरे लंड की लंम्बाई को मुहं में ऐसे ले रही थी जैसे अजगर बिना किसी निशान छोड़े अपने शिकार को निगल लेता हैं. पापा टॉप कंट्रोल ही नहीं कर पा रहे थे अपनी ख़ुशी को.

10 मिनट की फैंटास्टिक चुसाई के बाद पापा ने रेणुका आंटी की जांघे खोल के अपने लोहे जैसे गरम औजार को उसकी चूत का दरवाजा दिखा दिया.

दोनों इतने उत्तेजित थे की लंड चूत में ऐसे घुसा की गरम छुरी को मख्खन में डाला हो!

जब पूरा अंदर गया तो रेणुका आंटी के मुहं से लम्बी आह निकल गई.

छटपटाहट की रेणुका आंटी ने लंड के पहले पहले धक्को में. लेकिन फिर वो एडजस्ट हो गई पापा के मोटे लंड से. 20 मिनट तक पापा उसकी पेलते रहे और वो शेर की गिरफ्त में आई हुई हिरनी की तरह बस निचे लेट के लंड के धक्के खाती रही अपनी चूत में.

अब पापा की स्पीड एकदम बढ़ गई और रेणुका समझ गई की लावा उगल देगा लंड किसी भी वक्त.

पापा को रेणुका आंटी ने होंठो के ऊपर किस कर के अपने ऊपर दबा दिया. पापा भी समझ गए की रेणुका आंटी को लंड की सब मलाई अपनी चूत में निकलवानी हैं.

पापा बोले, अह्ह्ह अह्ह्ह्हुह्ह्हह्ह्ह अह्ह्ह्हह आई एम कमिंग डार्लिंग!

रेणुका आंटी ने बोला, डाल दो सब माल को मेरी मूनिया में.

पापा ने अब रेणुका आंटी के बाल पकड़ के एकदम फास्ट शॉट लगाए और सब का सब माल उसकी चुत के हवाले कर के लंड को निकाला.

रेणुका आंटी ने बची हुई दो बूंदों को भी नहीं छोड़ा और घुटनों के ऊपर बैठ के लंड को चाट के साफ़ कर गई.

पापा कपडे पहनने लगे और बोले, जल्दी करो मेरा बेटा हरामी हैं कब से तुम्हे देख रहा हैं वो भी.

रेणुका आंटी बूब्स को ब्रा में डालते हुए बोली, हाँ मैंने भी देखा की वो मेरी एस को ताड़ता हैं!

इधर मेरा माल कब से निकल गया था. लेकिन इन दोनों की बात से मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैंने फट से मोबाइल निकाल के दोनों के अधनंगे बदन और सेक्स की बातों की वीडियो बना ली. पापा और रेणुका आंटी कमरे से बहार आते उसके पहले ही मैंने वापस निकल गया.

Comments

  1. हेलो, दोस्तो मेरा नाम दुर्गेश है।

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  2. मेरी कहानी पढने के लिए दिए गै लिक पर किल्क करें

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