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मौसी और अकटारा को चोदा – देसी कहानी

गान्डू पति से गान्ड और मुझसे चूत मरवाती है (Gaandu Pati Se Gaand Mujhse Chut Marvati hai)

आज की कहानी मेरे बड़े जीजाजी के छोटे भाई और उसकी बीवी तथा मेरे बीच बने त्रिकोणीय सेक्स संबंधों की है।
कंचन के चले जाने पर यह घटना घटित हुई थी।
कंचन के बारे में जानने हेतु मेरी पूर्व प्रकाशित रचना कंचन की गुझिया सी चूत को पढ़ें।

कंचन के छोटे भाई का नाम अजय था वो मुझसे पाँच साल छोटा था। उसके लंड की लंबाई 15 सेंटीमीटर तथा मोटाई मेरे लंड से आधी थी।

एक जगह तिलक के निमंत्रण में मैं और अजय गए थे। वहाँ शाम को बाकी लोग तिलक कार्यक्रम में गए। मेरे और अजय के जिम्मे गेस्ट हाऊस में सामान की देखभाल थी। ठंड का समय था.. हम दोनों एक रजाई में थे। उसकी पीठ मेरी तरफ थी.. तभी वो अपनी गाण्ड को खुजाने के लिए हाथ पीछे लाया और खुजली करने लगा। अनजाने में मेरे लंड से उसका हाथ रगड़ खा रहा था। मेरा लंड खड़ा हो गया।

मैं धीरे-धीरे उसकी गाण्ड पर दबाव बनाते हुए लंड सटा दिया। कुछ देर बाद उसकी तरफ से विरोध ना होने पर उसके पैंट पर ऊपर से उसके लंड को टटोला.. वो उत्तेजित था।

मैं उसकी चैन खोल कर उसके लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगा, उसने भी मेरे लंड से खेलना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर उसके लंड की सुपाड़ी बुरी तरह चिकनी होने लगी, मैं समझ गया अब वो झड़ने वाला है, मैंने रूमाल उसके लंड के चारों ओर लपेट कर सिर्फ सुपारा खुला रहने दिया और उसे रगड़ने लगा। तभी वो स्खलित हो गया और वीर्य रूमाल में रूक गया।

मैंने उसे पोंछ दिया और उसे अपना लंड चूसने को बोला तो उसने मना कर दिया।
मैं बोला- अगर तुम चूसोगे तो तुम्हें बैट खरीद कर दूँगा।

वो मेरा लण्ड इस तरह चूसने लगा.. जैसे बछड़ा दूध पीता है। चूंकि उस समय मोबाइल था नहीं.. जिस पर ब्लू-फिल्म देखी जा सके। उस समय मंथन किताब और नंगी रंगीन एल्बम होते थे.. जिससे हम नए तरीकों से चुदाई और चूसना आदि सीखते थे।

मैं बोला- अब झड़ने वाला हूँ.. मुँह से बाहर मत गिराना.. बिस्तर गंदा हो जाएगा। अच्छा लगे.. तो पी लेना.. वरना नाली में थूक देना।

मैं उसके मुँह में झड़ने लगा.. उसने मेरा पूरा माल मुँह में रख लिया.. फिर वो उठा और वीर्य थूक कर आया।
अब हम दोनों शांत हो चुके थे।
उसने कहा- पहली धार गले के अन्दर चली गई थी.. वीर्य का स्वाद नमकीन था।

उस दिन के बाद से मेरे उसके साथ इसी तरह के रिश्ते बन गए।

फिर उसे गर्मी की छुट्टियों में मैंने अपने यहाँ बुलाया और रात में अपने कमरे में सुलाया। जब वो सो गया तो मैं उसकी चड्डी खोल कर लंड से खेलने लगा, उसका लंड जाग गया, थोड़ी देर बाद वो उठा और बोला- आज आप मेरा लंड चूसो।

मैंने जैसे ही उसके लंड के सुपाड़े के चमड़े को पीछे किया.. तो देखा उसके लंड पर बदबूदार सफेद पदार्थ लगा था।
मैंने बोला- इसे साफ रखा करो।
वो बोला- ठीक है।
मैंने उसके लंड को नहीं चूसा.. बल्कि अपना लौड़ा उसे चुसाया और बोला- आज इसे तुम्हारी गाण्ड में डालूंगा।

मैंने थूक और तेल आदि लगाकर गाण्ड में लंड डालने की कोशिश की.. पर वो बोला- भईया बहुत दर्द हो रहा है.. रहने दो।
मैंने सोचा चंद मिनट की उत्तेजना शाँत करने के लिए बेचारे की गाण्ड फाड़ना ठीक नहीं।
मैं बोला- ठीक है.. तुम पेट के बल लेट जाओ।

ऐसा करने के बाद उसके गाण्ड की माँसल दरारों के बीच लंड रगड़ कर मैं झड़ गया।
फिर मैंने उसको बैट दिलाया। अब इसके बाद जब भी हम मिलते इसी तरह खेल खेलते और एक-दूसरे की उत्तेजना का शमन करते।

पिछले वर्ष अजय की शादी हो गई और इस वर्ष शादी की वर्षगाँठ पर पार्टी किया और सभी को निमंत्रण देकर बुलाया।
रात में सभी महिलाएँ मेरी बहन के कमरे में सो गईं।

अजय बोला- भाई आज आप मेरे कमरे में सो जाईए।
मैंने कहा- यार तुम्हारे साथ तुम्हारी बीवी भी रहेगी.. लोग क्या सोचेंगे।
उसने बोला- मैं आपके सगी बहन का सगा देवर हूँ.. इस तरह आप मेरी बीवी के भी भाई लगेंगे और मैं भी तो हूँ साथ में.. कोई कुछ नहीं कहेगा।

मुझे उसकी बात में दम दिखा.. मैं अजय के कमरे में चला गया।
उसकी बीवी अलग बिस्तर पर और अजय और मैं एक ही बिस्तर पर लेट गए।

तभी लाईट कट गई.. अजय मेरे लंड से खेलने लगा। उसने मेरी लुंगी खोल कर मेरा लंड चूसना शुरू किया। थोड़ी देर बाद अचानक लाईट आ गई और उसकी बीवी ने देखा कि उसके पति के मुँह में मेरा मोटा और लम्बा लंड है, उसकी आँखें फटी रह गईं।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

वो बोली- सुदर्शन तुम तो गांडू हो.. पर तुम्हारा लंड तो अजय से दोगुना मोटा है और थोड़ा लंबा भी लग रहा है। तुम मुझे चोदो.. अजय के पतले लंड से अब मजा कम आता है।
मैंने कहा- आप मेरी बहन की देवरानी हैं.. तो मेरी भी तो बहन लगेंगी।
वो बोली- मुझे तुम रिश्ते मत सिखाओ। अपने मंझले जीजाजी के सगी बहन कृति से शादी की थी तुमने.. तब रिश्ते का ज्ञान कहाँ था।

कृति के बारे में जानने के लिए मैं रीना पूर्व प्रकाशित रचना चूत चोदकर शादी की

मैंने कहा- अजय तुम क्या कहते हो..?
अजय भी बोला- चोद दो साली को।
मैंने अजय की बीवी को बोला- लेकिन मेरी शर्त है.. आज अजय अपने पतले लंड से तुम्हारी आंसू निकालेगा। फिर मैं चोदूँगा।
वो समझते हुए बोली- ठीक है।

मैंने तेल लेकर उसकी बुर और गाण्ड पर अच्छे से लगाया। फिर अजय को लंड उसके गाण्ड मे डालने को बोला।
उसकी बीवी बोली- गाण्ड में दर्द होगा।
मैंने बोला- चूत में मेरा मोटा लंड चाहिए तो पति के पतले लंड को गाण्ड में ले लो।
वो राजी हो गई.. साली पक्की चुदक्कड़ लग रही थी।

अजय ने कई बार कोशिश की.. पर लंड गाण्ड में घुस ही नहीं रहा था।
मैंने उसकी बीवी से बोला- तुम दोनों हाथों से अपनी गाण्ड चौड़ी करो।
फिर मैंने अजय के लंड को उसकी गाण्ड के छेद पर सैट करके पेलने को कहा।
उसने जोर लगाया तो टोपा घुस गया.. बहुत प्रयास करने पर लंड थोड़ा अन्दर जाता.. फिर वापस लौट आता।

मैंने तेल को अजय के लंड के उस हिस्से पर लगाया.. जो गाण्ड से बाहर था। फिर बोला- जोर से पेलो..
उसने वैसा ही किया और सरसराकर पूरा लंड गाण्ड की छल्लेदार माँसपेशियों में कस गया।
उसकी बीवी दर्द से बोली- अबे धीरे-धीरे कर.. भाग थोड़े रही हूँ।

उसने लंड पीछे खींचा तो उस पर गाण्ड के श्लेष्मिक झिल्ली फटने के कारण खून लगा था।

मैं उसकी बीवी के बहते आंसुओं को पोंछ कर होंठों को चूसने लगा.. जिससे उसकी पीड़ा कम हो जाए।
फिर मैंने पूछा- और बताओ.. अब अजय का लंड मोटा लग रहा है या पतला..?

वो बोली- मेरी गाण्ड दर्द से भभक रही है और कटने के कारण छरछरा भी रही है। अब तो अजय का लंड कटहल का मूसल लग रही है। अब तो मैं अजय से सिर्फ गाण्ड मरवाऊँगी।
कुछ देर के बाद अजय उसकी गाण्ड में ही झड़ गया और उसने अपना लंड खींचा तो गाण्ड से ‘पुक्क’ की आवाज आई.. जैसे बोतल के कार्क खोलने पर होती है।

अब मेरा लंड उसकी बुर भेदने के लिए तैयार था।
अजय की बीवी ने उकड़ू बैठ कर जोर लगाया.. जिससे पादने के आवाज के साथ वीर्य भी गाण्ड से बाहर निकल गया।
वो बोली- अब तुम मेरी चूत चोदो..

मैं उसकी चूत में लंड डालने लगा.. उसकी चूत उतनी ढीली नहीं थी.. जितनी एक साल की चुदाई के बाद होती है। मैंने उसको हचक कर चोदा।
इसके बाद तो हम तीनों की तिकड़ी बन गई थी। अजय हर महीने एक बार शहर में होटल बुक करता और ‘चुदाई की त्रिकोणीय श्रृंखला’ शुरू हो जाती।

अजय बोला- बीवी हफ्ते में सिर्फ एक दिन चूत देती है.. बाकी दिन गाण्ड मरवाती है.. अब ये पहले से खुश रहती है।
मैंने कहा- चलो घर की बात घर में ही निपट जाती है..
इस बात से हम तीनों ही खुश हैं।

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