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मौसी और अकटारा को चोदा – देसी कहानी

माँ की चूत पर बेटे की नजर- 2

माँ बेटे की चुदाई कहानी में पढ़ें कि बेटे की वासनापूर्ण नजर भाम्प कर माँ की चूत भी गीली हो उठी. एक दिन बेटे ने माँ को नंगी देखा तो …

हैलो फ्रेंड्स, आप रोहन और उसकी मॉम के बीच शुरू होने वाली सेक्स कहानी का मजा ले रहे थे.
माँ बेटे की चुदाई कहानी के पिछले भाग
जवान बेटे की कामवासना
में अब तक आपने पढ़ा था कि रोहन जब अपनी मॉम की मादक आवाजों को सुनकर उसके कमरे के दरवाजे को खोल कर अन्दर देखने लगा.
तो उसे अपनी मॉम एकदम नंगी हालत में बिस्तर पर अपनी चुत में उंगली करती हुई दिखीं.
जैसे ही उसने ये नजरा देखा, उसी वक्त उसकी मॉम के मुँह से उसने अपना नाम सुना और वो स्खलित हो गई.

अब आगे माँ बेटे की चुदाई कहानी:

रोहन को समझ में आ गया था कि आग दोनों तरफ से बराबर लगी हुई है. अब बस पहल करने की देर है.
यही सोच कर रोहन की बांछें खिल गई थीं कि उसकी मॉम भी उसके बारे में वैसा ही सोचती है, जैसा वो सोच रहा है.

दोपहर में कुसुम रोहन को लंच के लिए बुलाने आई तो उसने देखा कि रोहन चादर ओढ़े सो रहा था.
लेकिन उसका बम्बू अभी भी तम्बू बनाए खड़ा था.

एक पल को तो कुसुम उस तम्बू को देख कर मुस्कुरा उठी, फिर पास जाकर उसके लंड के उभार को बहुत गौर से देखने लगी.
कुसुम को अपने बेटे का लंड काफी मोटा लग रहा था.

मोटे लंड की कल्पना से ही कुसुम की चूत से पानी रिसने लगा. उसका मन लंड छूने को करने लगा था.

उसने अपने बेटे के ऊपर से चादर हटाई तो देखा कि रोहन चादर के नीचे बिल्कुल नंगा लेटा था और उसका लंड किसी नाग की तरह फुंफकार रहा था.
उसके लंड का टोपा बिल्कुल लाल टमाटर के जैसा था.

ये नजारा कुसुम को लालच रहा था. उसने एक बार रोहन के चेहरे को देखा, तो उसे देख कर लगा कि वो निश्चिंत होकर सो रहा है.

कुसुम ने हिम्मत करके अपने बेटे के तनतनाते हुए लंड को पकड़ लिया.
लंड पकड़ते ही उसके बदन में झुरझुरी सी होने लगी.

उसके बेटे का लंड इतना सख्त था, जैसे उसने किसी लोहे की रॉड को पकड़ लिया हो.

अपने बेटे के लंड को पकड़ते ही कुसुम को पता चल गया कि ये चुत के अन्दर जाकर कितनी तबाही मचा सकता है.

यही सोचते सोचते कुसुम का चेहरा लंड पर झुकने लगा और उसने अपने बेटे के लंड के सुपारे को अपने मुँह में ले लिया.
कुसुम अपने बेटे के लंड के स्वाद में इतनी खो गई थी कि उसे पता ही नहीं चला कि रोहन ने कब अपनी आंखें खोल दी हैं.

कुसुम इस सबसे बेखबर अपने बेटे के लंड को चूसने में लगी रही.
उधर रोहन अपनी मॉम को लंड चूसते हुए देख रहा था.

दरअसल ये सब रोहन का ही प्लान था कि जब मॉम मुझे जगाने आएगी, तो मैं अपना लंड मॉम को दिखाऊंगा, जिससे मैं आगे बढ़ने की शुरुआत कर सकूं.
पर रोहन को ये नहीं पता था कि उसकी मॉम लंड देखते ही उसे चूसने तक पहुंच जाएगी.

अचानक रोहन की कामुक सिसकारी निकली तो कुसुम का ध्यान लंड से हटकर रोहन की तरफ आ गया.

तब कुसुम को अहसास हुआ कि वो क्या कर रही थी.
वो उठने को हुई ही थी कि तभी रोहन ने अपनी मॉम को पकड़कर बेड पर गिरा लिया और उसे अपने नीचे लेकर उसके ऊपर चढ़ गया.

अब कुसुम नीचे थी और उसका बेटा रोहन उसके ऊपर चढ़ा था.
रोहन का लंड कुसुम की चूत पर चुभ रहा था और रोहन की छाती से कुसुम के मम्मे पिसे जा रहे थे. रोहन ने अपनी मॉम के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और दोनों एक दूसरे को किस करने लगे.

चूमाचाटी परवान चढ़ने लगी और उसी दौरान रोहन का हाथ धीरे धीरे अपनी मॉम की चूत पर चला गया.
वो कपड़ों के ऊपर से अपनी मॉम की चुत को रगड़ने लगा.

कुसुम भी बहुत गर्म हो चुकी थी. रोहन अपना हाथ उसके पेट से होते हुए उसकी चूत पर अन्दर ले गया और उसने अपनी मॉम की चूत में एक उंगली डाल दी.

कुसुम अचानक से हुए इस हमले से चिहुंक उठी और वो पूरी ताकत से रोहन को पलटकर अपने ऊपर से हटा कर बाहर भाग गई.
रोहन आश्चर्य से उसे जाते देखता रहा.

कुसुम रोहन के कमरे से बाहर निकलकर अपने रूम में आ गई.
अपने कमरे में आकर कुसुम को अपनी गलती का अहसास हुआ कि वो अपने सगे बेटे के साथ कितना आगे बढ़ चुकी थी.
अगर थोड़ी देर और रुक जाती, तो आज उसकी चुदाई अपने बेटे से पक्का हो जानी थी.

कुसुम सोचने लगी कि इस मामले को यहीं रोका ना गया तो किसी न किसी दिन हम दोनों ये पाप कर बैठेंगे.

कुछ देर सोच विचार के बाद कुसुम कमरे से निकलकर बाहर आ गई और रोहन को आवाज दी.
रोहन को समझ नहीं आया कि अब उसकी मॉम उसे क्यों बुला रही है.

क्या वो अधूरा काम खत्म करना चाहती है?
ये सोचकर उसका लंड फिर से झटके मारने लगा.

वो कपड़े पहन कर नीचे आ गया.

कुसुम और रोहन दोनों टेबल पर आमने सामने बैठे थे.

अब कुसुम ने बोलना शुरू किया- देखो रोहन … जो हम लोग आज करने वाले थे, वो एक तरह का पाप है. तुम मेरे सगे बेटे हो … और मैं तुम्हारी सगी मॉम हूँ. हमें अब ये सब बंद कर देना चाहिए और अपने रिश्ते का लिहाज करना चाहिए. साथ ही ये सब करके हम तुम्हारे पापा को भी धोखा दे रहे हैं.

ये कहते हुए कुसुम की आंखें रुआंसी हो उठी थीं.

रोहन ने अपनी मॉम के हाथ को पकड़ा और कहा- मॉम मैं आपकी बात को अच्छे से समझ गया हूँ. मैं आगे से ख्याल रखूंगा कि आगे से हम कभी ऐसी गलती ना करें.

अगले दिन रोहन अपनी मॉम को किचन में उसकी थिरकती गांड देखकर फिर से पागल होने लगा.
वो बार बार अपना ध्यान अपनी मॉम की गांड पर से हटाना चाह रहा था … पर बार बार उसका ध्यान अपनी मॉम की सेक्सी गांड पर ही चला जा रहा था.

इससे उसका लंड फिर से खड़ा हो गया. उसे अपने लंड को संभालना मुश्किल होने लगा था.

इधर भले ही कुसुम ने अपने बेटे को समझा दिया था लेकिन उसके दिमाग में अभी भी हमेशा अपने बेटे का मोटा और सख्त लंड घूम रहा था.
उसके मन से अपने बेटे के लंड के स्वाद का अहसास मिट ही नहीं रहा था.

उस पल को वो भूल ही नहीं पा रही थी, जब रोहन का लंड उसकी चूत पर टिक गया था. वो बार बार उसके लोहे जैसे लंड को अपनी चूत पर महसूस कर रही थी जिससे उसकी चूत दिन भर गीली बनी रहती थी.

ऐसे ही दिन बीतने लगे.

कुसुम अब शेखर से बोलने लगी थी- तुम घर में आते ही मुझे चोद दिया करो … और सुबह जाने से पहले भी चोदकर जाया करो.

शेखर अपनी बीवी की ये बात सुनकर पहले तो चौंक गया, फिर वो खुश हो गया कि ये सही है. ऐसा उसे इसलिए लगा क्योंकि इतने सालों में कुसुम ने पहली बार शेखर को सामने से अपनी चूत चोदने के लिए बोला था.

शेखर अपनी बीवी की चुत को रात में आते ही और सुबह जाने से पहले धकापेल चोदने लगा था.
इससे कुसुम का ध्यान रोहन पर थोड़ा कम हो गया था.

लेकिन उधर रोहन का बुरा हाल हो रहा था. उसे अपने लंड पर काबू पाना बहुत मुश्किल हो रहा था. उसकी नजर ना चाहते हुए भी अपनी मॉम कुसुम की गांड और मम्मों को ताड़ती रहती थी.

अब उससे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था. उसने अपने कमरे से निकलना बंद कर दिया था. उसको समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे, कैसे अपने लंड में काबू पाए.
उसे पता था कि उसकी मॉम सही है और ये रिश्ता उन दोनों के बीच पाप का रिश्ता कहलाएगा.

एक हफ्ते बाद रोहन ने अपनी मॉम को बोला कि मॉम मैं दो दिनों के लिए अपने कॉलेज के दोस्त के घर जा रहा हूं. हम दोनों ने कॉलेज में प्लान बनाया था कि घर जाकर हम कहीं घूमने जाएंगे. कल उसका फोन आया था कि वो और हमारे कुछ दोस्त दो दिनों के लिए ऋषिकेश जा रहे हैं.

कुसुम ने भी कहा- ठीक है, कोई बात नहीं … तुम घूम आओ. मैं रात को तुम्हारी सारी पैकिंग कर दूंगी और शाम को तुम अपने पापा से परमिशन भी ले लेना.

दरअसल कल रोहन के पास करण का फोन आया था. वो उससे ऋषिकेश चलने के लिए बोल रहा था. करण के साथ दो लड़के और थे, जो उन्हीं के क्लासमेट थे.

शाम को शेखर के आते ही कुसुम ने रोहन के बारे में बताया कि रोहन अपने कुछ दोस्तों के साथ ऋषिकेश जाना चाहता है.
शेखर ने कहा- ठीक है, उसे यहीं बुला लेता हूँ.

तब तक कुसुम ने रोहन को आवाज देकर बुलाया और उसे शेखर के सामने खड़ा कर दिया.
कुसुम खुद पलट कर कुछ काम करने लगी.

शेखर- बेटा तुम्हें कब निकलना है?
रोहन ने जवाब दिया- जी कल सुबह छह बजे.
शेखर ने कहा- ठीक है, ध्यान से जाना और ये कुछ पैसे रख लो.

शेखर ने उसको अपने पर्स से दस हजार रुपए निकाल कर दे दिए और कहा- लो बेटा, जाओ घूमो फिरो और ऐश करो.

रोहन जवाब में मुस्कुरा दिया.

उसका ध्यान अभी भी अपनी मॉम की सेक्सी गांड पर ही था.

सुबह रोहन निकलने वाला था. उस समय शेखर अभी भी सो रहा था. रात भर की चुदाई से वो थक गया था.

पापा के सोने के कारण कुसुम, रोहन को बाहर तक छोड़ने आई. रोहन की कैब आ गई थी.

रोहन ने कैब में बैठ कर अपनी मॉम से कहा कि मॉम मैंने आपके लिए एक लैटर लिखा है, वो मेरे रूम में टेबल पर रखा है. प्लीज उसे पढ़कर दिल से सोचना.
इतना कह कर रोहन ने कैब वाले को आगे बढ़ाने के लिए कहा और वो निकल गया.

कुसुम रोहन के जाने के बाद उसके रूम में गई. वहां टेबल पर एक लैटर रखा हुआ था.
कुसुम उसे उठा कर पढ़ने लगी.

लैटर में लिखा था:

डिअर मॉम, पिछले कुछ दिनों में जो भी कुछ हुआ, वो अजीब जरूर था … पर बहुत अच्छा था.
मॉम मैं जब से चीजें समझने लगा हूं, तब से मैंने सिर्फ आपको ही चाहा है.
मैं ये मानता हूं कि जो रिश्ता हम दोनों के बीच बनने जा रहा था, वो समाज के लिए गलत है. लेकिन मॉम समाज तो हमारे घर के बाहर है … ना कि घर के अन्दर. घर में तो सिर्फ हम दोनों ही होते हैं.
और मुझे पता है कि हम दोनों ही इस रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते हैं, पर इस समाज की वजह से हम रुक रहे हैं.
मैं बस आपसे जानना चाहता हूं कि क्या आपके लिए समाज मुझसे बढ़कर है.
आपके पास तो पापा का सहारा है, पर मेरे लिए कौन है. मैं सिर्फ आपसे प्यार करता हूं और आपसे ही करता रहूंगा.
मेरे लिए इस चीज को भुला पाना नामुमकिन सा है. मैं चाहता हूं कि जब मैं वापस आऊं … तो हम दोनों एक दूसरे के लिए तैयार रहें.

कुसुम ये लैटर पढ़कर सोच में पड़ गई कि अब वो क्या करे.

वो इस बात से सहमत थी कि समाज, इस घर के बाहर है. घर में तो सिर्फ हम दोनों ही होते हैं. वो भी मन ही मन चाहती थी कि रोहन का लंड उसकी चूत की धज्जियां उड़ा दे.

अब उसे समाज का भी डर नहीं था.
लेकिन उसे फिर एक चिंता ने घेर लिया कि ये सब करके वो अपने पति शेखर को धोखा देगी.
वो शेखर को धोखा नहीं देना चाहती थी … और अब वो आगे भी बढ़ना चाहती थी.
उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.

तभी शेखर ने उठते ही कुसुम को आवाज दी.
कुसुम भागी भागी शेखर के पास आ गई.

शेखर ने उसे खींचा और अपने ऊपर लिटा कर उसे किस करने लगा.
कुछ ही पलों बाद शेखर ने कुसुम को अपने नीचे लेटाया और उसके ऊपर चढ़ गया. वो अपने शरीर को कुसुम के मादक शरीर पर रगड़ने लगा.

कुछ ही पलों के बाद शेखर धीरे से नीचे सरक गया और उसकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठा कर अपना मुँह उसकी चूत के पास लगा दिया.
कुसुम की गर्मी बढ़ने लगी.

शेखर अपनी बीवी की संगमरमरी जांघों को चाटने के बाद उसकी चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा.
कुसुम की जोर की आह निकल गई.
और शेखर बड़े प्यार से उसकी चूत चाटने और कुरेदने लगा.

कुसुम की वासना से भरी हुई गर्म सिसिकारियां तेज़ होती चली गईं और उसे बहुत मज़ा आने लगा था.

शेखर उठकर पलट गया और दोनों 69 की पोजिशन में आ गए.
अब कुसुम भी शेखर के लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी. वो उसके लंड की चमड़ी को ऊपर नीचे करते हुए सुपारे को चाटती और लंड के तने को बड़ी तल्लीनता से चूसने लगी.
लंड चूसने के साथ ही कुसुम मादक आहें भी भर रही थी.

कुछ पल बाद शेखर ने उसे सीधा कर दिया और अपना लंड उसकी चूत पर टिकाकर एक जोरदार शॉट मार दिया.
इससे कुसुम की चीख निकल गई- आहह ओह … ज़ोर से चोदो डियर … येसस्स … ऐसे ही अहह ऊऊओह येस … कितना मोटा लंड है तुम्हारा … आहह मेरी चुत को मज़ा आ गया … ऐसे ही … चोद दो मुझे आह.

शेखर धीरे उसको चोदने लगा.
फिर स्पीड बढ़ गई और इसी तरह दस मिनट तक धकापेल चोदने के बाद शेखर ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी.
स्पीड बढ़ाने के साथ साथ वो कुसुम की चूचियों को भी कसकर भींचने लगा.

शेखर का काम तमाम होने वाला था और कुसुम का भी स्खलन होने को था.

दो पल बाद कुसुम झड़ने लगी और उसके मुँह से ‘ओह रोहन आह रोहन …’ निकल गया.

शेखर भी कुसुम की चूत में झड़ गया … पर कुसुम के मुँह से रोहन का नाम सुनकर वो चौंक गया था.
झड़ने के बाद दोनों हांफ रहे थे.

तभी कुसुम शेखर से बोली- शेखर, मुझे तुम्हें कुछ दिखाना है.
ये बोलकर कुसुम ने शेखर को रोहन का लिखा हुआ लैटर दिखाया.

शेखर ने वो लैटर पढ़ा. मगर उसकी समझ में कुछ भी नहीं आया कि ये सब क्या है.
उसने कुसुम से पूछा कि ये सब क्या है?

कुसुम ने उसे रोहन के आने से आज सुबह तक की सारी बात शेखर को बता दी.

फ्रेंड्स, रोहन के डैड ने इस लैटर को पढ़कर क्या कहा, इस सबका खुलासा सेक्स कहानी के अगले भाग में होगा.

आपको इस माँ बेटे की चुदाई कहानी के लिए क्या कहना है, प्लीज़ मेल जरूर करें.

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