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मौसी और अकटारा को चोदा – देसी कहानी

गलती किसकी-5

बेटे के लंड से चुदाई के बाद भी मैं विचलित थी. मैंने हिन्दी सेक्स कहानियां पढ़ीं. कई कहानियां मेरी कहानी जैसी थी तो मेरे विचार बदले. मैंने उसे सब कुछ सौंप देने का फैसला कर लिया.

मैं मीरा आज अपनी कहानी की सबसे रोचक जानकारी देने जा रही हूं. यहीं से मेरे जीवन या आप कह सकते हैं मस्तिष्क का परिवर्तन हो गया.

मैंने अपनी घटना को पिछले भाग
गलती किसकी-4
में जहां खत्म किया था वहीं से शुरू करती हूं.

उस दिन आकाश मेरे लिए ब्रा-पैंटी के 4 सेट और 2 नाइटी लेकर आया था. उसने मुझे अपनी बहन यानि कि मेरी बेटी के सामने ही नंगी कर दिया. उसने मुझे पैंटी पहना कर और ब्रा भी पहना दी.

उसके बाद उसने मेरे हाथ में फोन थमाते हुए कहा- आज से यह फोन आपके पास ही रहेगा.
फोन का तो मेरे पास कोई काम ही नहीं था. उम्र के इस मोड़ पर मुझे फोन की जरूरत नहीं महसूस होती थी. मेरे पास फोन में करने के लिए ऐसा कुछ था ही नहीं जो मेरे काम आ सके. न कोई बात करने वाला था.

फिर रात को खाना होने के बाद सब लोग सोने लगे. आकाश ने उस रात मुझे नंगी कर दिया. उसने कहा था कि आज वो मेरी चूत के बाल साफ करेगा.

मुझे नंगी करने के बाद वो मेरी चूत पर बाल साफ करने की क्रीम लगाने लगा. मैं थोड़ा बहुत विरोध कर रही थी लेकिन सोनिया ने मेरे पैरों को पकड़ रखा था और फैला रखा था.

आप सोच कर देखिये कि एक मां अपने बच्चों के सामने नंगी बैठी हुई है जिसके पैरों को उसकी बेटी ने फैला रखा है और उसका बेटा अपनी मां की चूत पर बाल साफ करने वाली क्रीम लगा रहा है!

फिर आकाश ने मेरी चूत के बालों को साफ कर दिया. मेरी चूत को क्लीन शेव करने के बाद आकाश ने सोनिया से कहा- बहन तुम अब मां की चूत के रस का सेवन करो और मैं मां के दूध का सेवन करूंगा.

आकाश ने मेरी चूचियों को अपने हाथों में कस कर पकड़ लिया और उनको बॉल की तरह दबा कर देखने लगा.
फिर वो बोला- मम्मी, अब आप अपनी टांगों को चौड़ी करके सही पोजीशन में बैठ जाओ.

मैं कुछ नहीं बोली.
फिर से आकाश ने कहा- अब मान भी जाओ मम्मी, अब क्या बचा है?
मैं अभी भी चुप ही रही.
फिर सोनिया ने कहा- भैया, आप अम्मी को अकेले नहीं चोद सकते हो क्या?
वो बोला- नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. मां अब हम दोनों के साथ में ही चुदा करेगी.

सोनिया ने मेरे पैरों को फैला दिया और आकाश ने मेरी चूत में मुंह दे दिया और मेरी चूत को चूसने लगा. मैं भी गर्म होने लगी. आकाश ने पूरी जीभ अंदर डाल दी और मैंने आकाश के सिर को अपनी चूत पर दबाना शुरू कर दिया.

कुछ ही देर में मेरी चूत का पानी निकल गया.
आकाश ने सोनिया को दिखाते हुए कहा- देख सोनिया, मां की चूत का पानी निकल रहा है.
सोनिया बोली- चाट लो भैया.

आकाश बोला- तू क्या कर रही है, चल आकर अब मां के बूब्स को दबा.
सोनिया बोली- वाह भैया, इससे अच्छी बात क्या हो सकती है कि मां की चूचियों को दबाने का मौका मिला है मुझे.

फिर आकाश ने मेरी चूत में अपना लंड डालने की कोशिश की लेकिन मैं नहीं हिली.
वो बोला- मान जाओ मम्मी, नहीं तो हम आपको इस तरह से छोड़ने वाले नहीं है, आपके साथ ऐसे ही करते रहेंगे.

उसने मुझे घुमा कर मेरी चूत में लंड दे दिया और मुझे चोदने लगा. मैं एक बार फिर से चुदने के लिए तैयार हो गयी लेकिन अंदर से मेरी इच्छा नहीं हो रही थी. उस रात में भी आकाश ने मुझे बुरी तरीके से चोदा.

अगली सुबह वो तैयार होकर अपने ऑफिस में चला गया. फिर सोनिया नाश्ता लेकर आ गयी. वो मुझे समझाने लगी.
सोनिया बोली- मम्मी आप दुनिया में अकेली नहीं हैं जो अपने बेटे से चूत मरवा रही हैं.

इनको भी पढ़ कर देख लो.
उसने मेरे सामने सेक्स स्टोरी साइट खोल कर दे दी.
उसमें देसी इंडियन नंगी लड़की दिखाई दे रही थी. जवान लड़की की नंगी फोटो देख कर मेरा ध्यान उस पर गया लेकिन मैंने स्टोरी पढने से मना कर दिया.

सोनिया वहां से चली गयी. उसके जाने के बाद मैं फिर से फोन उठा कर वही साइट पर वो पेज खोला और देखने लगी. पहली दो स्टोरी मैंने पढ़ी जो काफी सेक्सी स्टोरी थी.

शाम के 5 बजे तक मैं स्टोरी पढ़ती रही और सोचती रही कि यह सब करना सही है या गलत. कुछ देर सोचने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अगर ये सब जो लिखा हुआ है वो सही है तो वाकई में बेटे के साथ सेक्स और भाई बहन का सेक्स करने में कोई बुराई नहीं है.

मगर ये भी तो हो सकता है कि ये किसी इन्सान के दिमाग की कल्पना ही हो. मगर एक बात यह भी थी कि आकाश के लंड से चुदते हुए मजा तो मुझे भी आता था. इसको मैं नकार नहीं सकती हूं.

उन कहानियों में से बहुत सी कहानियां तो मुझे सही भी लगीं. एक कहानी मैंने पढ़ी जिसको 17 भागों में लिखा गया था. उस कहानी को मैंने पूरा पढ़ा. उस कहानी में बहुत कुछ मेरी कहानी से मिलता जुलता था. उसमें लगभग वही घटनाएँ थीं जो मेरे साथ भी हुई थीं.

फिर मैंने अपनी जिन्दगी की कहानी की तुलना उससे की और देखा कि मेरी कहानी तो इतनी लम्बी नहीं है.
मैं कहानियां पढ़ती गयी और जैसे जैसे मैं उन कहानियों से गुजर रही थी अब वैसे ही धीरे धीरे मेरे मन के विचार के भी बदलने लगे थे. स्वत: ही मैं अपनी कहानी को अपने बेटे से जोड़ने लगी. अपनी कहानी के रूप में मैं अपने बेटे को देख रही थी.

आकाश मेरे लिए बिकनी और पैंटी भी लेकर आया था. मगर मैं अभी तक उनको नहीं पहन रही थी. मैं काफी परेशान सी थी उन दिनों में. सोनिया रोज मुझे कहानी पढ़ने के लिए देती थी. वो चुपचाप मुझे देखती रहती थी और फिर मुस्करा देती थी. मैं उसको कुछ नहीं बोलती थी.

इसी तरह से तीन महीने बीत गये थे. मुझे भी समझ में आ गया था कि अब इसका कोई समाधान होना नहीं है. जो होना है वो तो होकर ही रहेगा. अगर सेक्स कहानी जगत में लेखक मस्तराम नहीं होता तो मेरी कहानी भी नहीं होती.

उसकी कहानी से ही मुझे अपनी कहानी लिखने की हिम्मत मिली.

उस दिन करवा चौथ का दिन था. मैंने सोच लिया था कि करवा चौथ के दिन मैं संपूर्ण रूप से अपने बेटे की हो जाऊंगी. आज मेरा मन कर रहा था कि मैं अपनी इच्छा से अपने बेटे के साथ चुदाई करूं. मैं उसके जिस्म का आनंद ऐसे लेना चाहती थी जैसे मैं अपने पति के साथ चुदाई का आनंद लिया करती थी.

मैं सुबह उठी और नहा धोकर तैयार हो गयी. इससे पहले कि मैं कुछ बोलती उसी समय सोनिया आई और बोली- मम्मी, मैं आकाश की पत्नी बन चुकी हूं. मैंने उसके लिए करवाचौथ का व्रत रखा है. शाम को हम आपके लिए बाहर से खाना मंगवा देंगे.

उसकी बात सुन कर मैंने पेट खराब होने का बहाना कर दिया और बोली- मुझे भी आज भूख नहीं है. मैं तो सोने जा रही थी.
सोनिया बोली- ठीक है आप सो जाओ, वैसे आज आकाश जी बाहर से खाकर आयेंगे और हमारे लिये सामान लेकर आएंगे.

मैं बिना कुछ बोले ही छत पर चली गयी. शाम को 6.30 बजे आकाश छुट्टी लेकर आ गया.

सोनिया ने लाल साड़ी पहन रखी थी और वो खिड़की के पास खड़ी होकर चांद को देख रही थी. आकाश ने भी चांद को देखा और उसका व्रत छुड़वाया.

जब सोनिया तैयार हो रही थी उसी वक्त मैं नीचे तैयार हो चुकी थी. मैंने आकाश की दी हुई ब्रा पैंटी पहनी थी और साड़ी भी पहन ली थी. मैं तैयार होकर थाली और पानी लेकर बैठी हुई थी. कुछ देर के बाद आकाश नीचे आया और जैसे ही उसकी नजर मुझ पर पड़ी वो मुझे देख कर एकदम से दंग सा रह गया. उसको मेरा ये रूप देख कर यकीन ही नहीं हुआ.

वो बोला- मम्मी आप भी?
मैंने कहा- मुझे मम्मी न बोलिये. आज से मैं आपकी पत्नी बन रही हूं. सुबह से मैंने भी आपके लिये करवाचौथ का व्रत रखा हुआ है. यह सिंदूर अभी इसी वक्त मेरी मांग में भर दीजिये और मुझे अपना बना लीजिये.

आकाश मुझे छत पर लेकर गया. सोनिया भी मुझे देख कर दंग रह गयी.
वो हैरान होकर बोली- मम्मी!
इससे पहले कि वो कुछ और बोलती आकाश ने उसको चुप रहने का इशारा कर दिया.

उसके बाद उसने मेरी मांग में सिंदूर भरा. फिर उसने मंगलसूत्र उठाया और मेरे गले में पहना दिया. उसके बाद आकाश ने मुझे पानी पिला कर मेरे व्रत को तुड़वा दिया.

आकाश ने उसके बाद मुझे अपनी बांहों में लेकर कहा- मुझे आज बहुत खुशी हो रही है मम्मी.
मैं बोली- मैं तुम्हारी मम्मी नहीं, मैं मीरा हूं और पत्नी हूं आपकी.

सोनिया बोली- मैंने इनको आपकी पत्नी बनाने में बहुत मदद की है भैया. अगर मैं रोज इनको भाई-बहन की चुदाई और मां बेटे की चुदाई वाली कहानियां पढ़ने को नहीं देती तो आज ये आपकी पत्नी नहीं बन पाती.

आकाश बोला- हां, मैं सब जानता हूं.
उसके बाद हम तीनों लोगों ने साथ में खाना खाया. उसके बाद हम छत पर ही आ गये. आकाश ने धीरे धीरे मेरे सारे के सारे कपड़े उतार दिये. अब मैं केवल ब्रा और पैंटी में ही रह गयी.

उसके बाद आकाश ने सोनिया के भी सारे कपड़े उतार दिये. सोनिया ने ब्लैक रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी. अब हम दोनों ने आकाश के कपड़े भी उतार दिये.

आकाश बहुत खुश नजर आ रहा था. आज करवाचौथ के दिन मैं भी अंदर से बहुत खुश थी. मुझे मेरा पति मिल गया था. अब मैं भी सुहागन हो गयी थी. अब मुझे किसी से कोई गिले शिकवे नहीं रह गये थे. मैंने आकाश के जिस्म को गौर से देखा और फिर उसके मस्त मोटे लंड को अपने हाथ से छूकर देखने लगी.

सोनिया के चेहरे पर आज खुशी नहीं थी. उसके चेहरे की मुस्कान कहीं गायब सी हो गयी थी. अब मैं आकाश के लंड को चूस रही थी. आज मुझे आकाश के लंड को चूसने में असली मजा आ रहा था. मैंने पूरी तबियत के साथ लगभग दस मिनट तक उसके लंड को लॉलीपोप की तरह चूस डाला.

अब आकाश ने मेरी चूत में उंगली डाल दी और अपनी उंगली को मेरी चूत में चलाने लगा.
मैंने कहा- जब तुम्हारे पास इतना अच्छा लंड है तो उंगली क्यों? अगर उंगली ही करनी थी तो फिर ये लंड किस काम का? मुझे अपने पति के लंड का रस चाहिए. मैं बहुत सालों से प्यासी हूं.

आकाश बोला- जान, थोड़ा सब्र तो करो. इसका रस भी मिलेगा. पहले तो मैं आपकी चूत का रसपान करूंगा.
आकाश ने मुझसे अपनी चूत को उसके मुंह पर लगाने के लिए कहा. मैंने अपनी चूत को आकाश के होंठों पर रख कर दबा दिया. उसके होंठों पर मेरी चूत की दरार लगी तो बदन में सरसरी दौड़ गयी.

अब वो मेरी चूत को नीचे से चाटने लगा. कुछ देर चाटने के बाद उसने मेरी चूत में नीचे से लंड डाल दिया.
नीचे से मेरी चूत में लंड डालते हुए वो बोला- देख सोनिया, आज मम्मी अपनी इच्छा से ही सब कुछ करवा रही है. आज मुझे बहुत खुशी हो रही है मम्मी को इस तरह से खुश होते हुए देख कर.

मैंने आकाश से कहा- आप मुझे मम्मी न बोलिये, मेरा नाम मीरा है, मुझे मीरा ही कहा कीजिये.
आकाश ने सोनिया को इशारा किया- चूचियों को तुम चूस लो.

सोनिया ने बेमन से मेरी चूचियों को चूसना शुरू किया.
मैं भी जोश में आकर बोली- सोनिया, अभी तो शुरूआत है बेटी. अभी तो बहुत कुछ देखना बाकी है. तुम दोनों ने मेरे अंदर की बुझी हुई आग में घी डाल दिया है. इतने साल से मैंने किसी तरह खुद को शांत रखा हुआ था.

आकाश बोला- ये हुई न बात, अब मैं अपनी पत्नी के साथ खूब मजा ले सकता हूं.
मैंने आकाश को छेड़ते हुए कहा- पत्नी के साथ नहीं, पत्नियों के साथ कहिये.

सोनिया बोली- मम्मी को पाकर आप हमें भूल ही गये हैं. सोनिया ने शिकायती अंदाज में कहा.
मैं सोनिया की चूचियों को दबाते हुए बोली- भूल कैसे जायेंगे जान, तुम्हारे चूतड़ों में इनके लंड को तो मैं ही डालूंगी.

वो बोली- तो फिर आपकी चूत का रस मैं ले सकती हूं?
मैंने कहा- इसके बारे में तो मेरे पतिदेव से पूछा. उनसे पूछे बिना तो तुम कुछ नहीं ले सकती. लेना तो क्या तुम मेरी चूत को टच भी नहीं कर सकती.

आकाश बोला- मम्मी, आप मुझे खुश कर दें. उसके बाद आप जो कहेंगे वो मैं करने के लिए तैयार हूं. बस आप मेरा साथ दीजिये.
मैं बोली- अब तो आप पति बन गये हैं, आपका पूरा हक है हम पर.

ऐसा बोलते ही आकाश ने मेरे मुंह में लंड दे दिया. मेरे होंठों को चोदते हुए वो बोला- आह्ह जान.. तुम्हारा ये अंदाज बहुत पसंद आया.
इतने में ही मैंने उसके लंड पर दांतों से काट लिया.
वो दर्द में कराहते हुए बोला- ओह्ह … अगर ऐसे करोगी और लंड को खाने लगोगी तो फिर चूत में क्या लोगी?

मैंने उसके लंड को मुंह से निकाल कर कहा- चूत में आप लंड को डाल कहां रहे हो?
तभी उसने मेरी टांगों को खोल कर मेरी चूत में लंड को डाल दिया और तेजी के साथ पेलने लगा.

उसने पूरी तेज स्पीड से मेरी चूत को चोदना शुरू कर दिया. दस मिनट तक उसने मेरी चूत को फाड़ देने वाली चुदाई की. फिर उसके लंड से वीर्य के फव्वारे मेरी चूत में गिरने लगे.

मेरी चूत में वीर्य को भर कर वो मेरे ऊपर चिपक कर लेट गया और थक कर सो गया. मैं सोनिया को अपनी बांहों में लेकर चूचियां दबाने लगी. तभी आकाश उठ गया.
वो बोला- मम्मी, पहले आप बहन को गर्म करो. उसके बाद मेरा लंड तैयार होगा.
सोनिया ने कहा- पहले लंड को तैयार कर लो. जब लंड तैयार हो जायेगा तो मैं तैयार ही हूं.

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
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