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मौसी और अकटारा को चोदा – देसी कहानी

दोस्त की बीवी ने बहाने से चूत चुदाई

मेरा नाम राज गर्ग है. मैं दिल्ली में रहता हूँ। मेरा एक वाइफ स्वापिंग क्लब भी था जैसा कि में आपको अपनी पुरानी कहानी

में बता चुका हूं क्लब के चलते मेरा डिवोर्स हुआ; यह भी मैं आपको बता चुका हूं. अब मैं एक अच्छी पार्टनर की तलाश में हूँ. डिवोर्स के बाद में बिल्कुल अकेला महसूस करने लगा हूँ क्योंकि जिसे रूटीन में चूत लेने की आदत हो वो कैसा महसूस करेगा ये तो आप समझ सकते हो.

मैं आपका ज्यादा समय खराब नहीं करते हुए सीधा कहानी पर आता हूं. ये कहानी मेरे एक दोस्त शीराज और उस की वाइफ ज़ायरा की है; जब मैंने ज़ायरा की मसाज करते करते उसकी चुदाई की है जो कि मेरे दोस्त के घर पर ही उसकी गैरमौजूदगी में हुई।

हुआ यह कि एक दिन मेरे दोस्त का कॉल आया कि उसका ट्रांसफर दिल्ली से मुंबई हो गया है तो उसे दो दिन के अंदर मुंबई शिफ़्ट होना था.
उसको मेरी कुछ हेल्प चाहिए थी।

एक बात और मैं आपको बता दूँ कि जब मैंने अपना वाइफ स्वाइपिंग क्लब शुरू किया था, तब एक बार मेरी पत्नी ने शीराज और ज़ायरा के बारे में भी बात करी थी. क्योंकि मेरी पत्नी शीराज को पसंद करती थी.

और ज़ायरा तो बहुत ही शानदार औरत है। उसका कद थोड़ा कम था, मगर गोरी चिट्टी, भरपूर बदन की खूब सेक्सी औरत है। दो बच्चों की माँ है, मगर आज भी फंटास्टिक लगती है।
उसके जिस्म पर सबसे खूबसूरत चीज़ उसके भारी मम्मे हैं। हर कोई उसके मम्मों को ही घूरता रह जाता है। उसको भी पता है कि हर कोई उसके गोरे मोटे मम्मों का दीवाना है.
और वो भी अक्सर अपनी हर ड्रेस में चाहे वो साड़ी हो या सूट, अपना थोड़ा सा क्लीवेज हमेशा दिखा कर रखती है।

मैं और शीराज अक्सर एक दूसरे को मज़ाक करते थे. मैं कहता था कि तेरी बीवी से तो गले मिल कर मज़ा आ जाए.
और वो कहता था- तेरी बीवी से गले मिल कर मज़ा आ जाए।
क्योंकि मुझे भरी भरी औरतें पसंद हैं और शीराज को स्लिम और ब्यूटीफुल औरतें पसंद है।

मेरी बीवी को भी शीराज पसंद था. इसीलिए उसने मुझे शीराज और ज़ायरा को अपने स्विंगर्ज़ क्लब में शामिल करने को कहा था। मगर किसी वजह से मैं शीराज और ज़ायरा को अपने क्लब में नहीं शामिल कर पाया।

हालांकि बाद में धीरे धीरे क्लब में न जाने क्यों औरतों ने आना कम कर दिया. और एक बार तो ऐसा हुआ कि हम 5 मर्द थे और सिर्फ दो औरतें एक मेरी बीवी और एक मेरे दोस्त प्रेम की बीवी। 
तो उस दिन तो उन दोनों औरतों ने 5 मर्दों की बरदाश्त किया, मगर साथ में ये भी कह दिया कि आगे से सिंगल मर्द को एंट्री मत दो। वो अपनी बीवी को तो घर छोड़ आते हैं, और यहाँ आकर दूसरों की बीवियों को चोद कर अपनी वासना की पूर्ति करते हैं।

जब मैंने रूल सख्त किए तो साले यार दोस्तों ने क्लब में आना ही छोड़ दिया, और फिर धीरे धीरे मेरा क्लब ही खत्म हो गया।

बाद में कुछ दोस्तों ने और घटिया बात करी कि अक्सर मेरी बीवी को फोन करके, क्लब की बातें करते और उसे बाहर मिलने के लिए बुलाने लगे।
एक कमीने ने तो पैसों की ऑफर कर दी।
इस वजह से मेरा अपने कुछ दोस्तों से लड़ाई झगड़ा भी हो गया। मगर ये बात मेरी बीवी को बहुत नागवार गुज़री जिस वजह से हम दोनों में अक्सर कहा सुनी और झगड़े बढ़ने लगे और फिर एक दिन हमारा तलाक भी हो गया।

बीवी के जाने के बाद मैं बहुत अकेला हो गया और अपने लंड को शांत करने के लिए बहुत से कुदरती, गैर कुदरती और न जाने कैसे कैसे तरीके अपनाने लगा।
मगर इन सब में वो मज़ा नहीं था। एक औरत के नंगे जिस्म के ऊपर लेट कर उसको मसलते हुये, चूमते चाटते, उसको चोदने में जो सुख है वो और किसी भी चीज़ में नहीं मिलता। 

बल्कि एक दो बार तो मुझे लौंडे भी मिले, सोचा कि ट्राई के करके देखता हूँ। मैं झूठ नहीं बोलता, मैंने दो लौंडों की गांड भी मारी है। मगर फिर भी उनमे वो औरत वाली फीलिंग नहीं आती। उनको चूमने का दिल नहीं करता, उनको तो बस अपना लंड चुसवाओ और कोंडोम डाल कर उनकी गांड मार लो।

मगर जो एक नंगी औरत आपके सीने से लगती है, तो उसके भरे हुये मम्मों की नर्मी आपके सीने को अहसास देती है, वो लौंडों में कहा। एक औरत के लबों में रस है, वो किसी लौंडे के लबों में कहाँ।

और सबसे ज़रूरी बात, जो मज़ा औरत की चूत को चाटने में मिलता है, वो किसी लौंडे में कहाँ। आपकी तरह उनके पास भी एक लंड होता है। और बस उस लंड को देखते ही, सारा नशा भी उतार जाता है; सारा मूड भी बिगड़ जाता है।
तो लौंडों के साथ मेरा तजुरबा तो बिल्कुल बेकार रहा।

इसलिए मैं अपने लिए किसी औरत को खोज रहा था। आस पड़ोस की औरतों से बड़े अच्छे से पेश आता कि शायद कोई पट जाए। एक तलाक़शुदा से दोस्ती भी हुई मगर वो एक खास दूरी बना कर रखती।
गली मोहल्ले बाज़ार हर जगह मैं जब औरतों को देखता तो सोचता- भैंनचोद, दिल्ली में एक से एक भोंसड़ी है। भरी पड़ी है सारी दिल्ली चूतों से, मगर साली मेरे लिए एक भी नहीं मिल रही। 

खैर जिस दिन शीराज का फोन आया और उसने मुझे बताया कि उसका तबादला दिल्ली से मुंबई हो गया है, और अगले दो दिनो में उसे वहाँ शिफ्ट होना है और इस वजह से उसे मेरी हेल्प चाहिए.
तो मैं भी उसकी हेल्प करने को चल पड़ा।

मुंबई में मेरी मौसी की लड़की रहती है. मैंने उससे बात करके शीराज के मुंबई में रहने का इंतजाम तो कर दिया मगर यह इंतजाम सिर्फ 2-4 दिन के लिए था ताकि शीराज वहाँ आस पास में कोई घर ढूंढ कर अपने परिवार को रख सके।

अब परिवार के नाम पर शीराज और ज़ायरा ही थे क्योंकि उनके दोनों बच्चे तो बोर्डिंग स्कूल में शिमला में पढ़ते थे। तो मैंने भी सोचा कि घर पर अकेले बोर होने से तो अच्छा है कि वहीं चल कर शीराज की हेल्प कर दी जाए उसका भी काम हो जाएगा; मेरा खाली समय भी अच्छे से पास हो जाएगा।

तो मैं तैयार होकर उसके घर पहुंच गया। मैंने अपनी गाड़ी पार्किंग में खड़ी की और उसके घर पहुंचा. उसकी डोर बेल बजायी, जैसे ही गेट खुला, सामने ज़ायरा थी।
सफ़ेद काटन के कुर्ते और स्किन टाइट जीन्स में वो बहुत ही शानदार दिख रही थी।

एक बार तो दिल में आया के आगे बढ़ कर उसे गले से लगा लूँ, मगर नहीं!
बेशक उसके साथ मैं खुल कर हंस बोल लेता था, मगर अभी मुझे उसको इस तरह से बांहों में भरना बदतमीजी लगा.

तो मैंने हाथ जोड़ कर कहा- नमस्ते भाभी, कैसी हो आप?
वो भी खुल कर मुस्कुरा दी- अरे नमस्ते भाई साहब, आज आपको हमारी याद कैसे आ गई?
मैंने कहा- कल शीराज के फोन आया था कि उसकी बदली मुंबई की हो गई है, तो उसने मुझे हेल्प के लिए कहा था।

वो मुस्कुराती हुई आगे चल पड़ी और बोली- ओह हो ... तो आप आये हैं मेरी हेल्प करने!
मैं उसको जाते हुये देख रहा था. मोटी गांड, साली दोनों चूतड़ थलल थलल करके हिलाती हुई जा रही थी।

दिल किया कि साली की गांड पर एक चपत लगाऊँ।
मगर नहीं ... दोस्त की बीवी है, रहने दो।

मैंने पूछा- शीराज कहाँ है?
तो वो बोली- ये अभी किसी जरूरी काम से बाहर गए हैं, थोड़ी देर में आ जाएंगे. तब तक मैं आपके लिए कॉफ़ी लाती हूँ।
लेकिन मेरा मन तो उससे देखकर उसका दूध पीने का मन था.

फिर सोचा कि गलत है दोस्त की पत्नी है पता नहीं क्या सोचेंगी. और अभी तो सिर्फ औपचारिकता चल रही है, भाई साहब भाभी जी।

वैसे तो शीराज के सामने मैं उसका नाम भी ले लेता हूँ। मगर जब तक अगली कोई इशारा नहीं देती मैं कैसे बेतकल्लुफ़ हो जाऊँ. इसलिए मैंने अपने लंड को समझाया कि बेटा हर चूत देख कर अंगड़ाइयाँ मत लेने लग जया कर! ज़रूरी नहीं कि हर चूत में घुसने का मौका मिले तुझे।

तो मैं सोफ़े पर बैठ कर टीवी ऑन करके पिक्चर देखने लगा और 5 मिनट में ज़ायरा कॉफी बना लाई।
वह मेरे साथ बैठ कर ही कॉफी पीने लगी.

काफी देर तक इधर उधर की फालतू बातें होती रही.
इसी बीच उसने मेरे तलाक की भी बात करी और मेरे तलाक का अफसोस भी ज़ाहिर किया.

इसी दौरान मैंने मौका देख कर अपना दुखड़ा भी रो दिया ताकि उसको ये पता चल जाए कि मैं अकेलेपन से कितना दुखी हूँ।

कुछ देर और बातें होती रही।

उसके बाद मैंने शीराज से फोन पर बात करी।
उसने कहा कि वो अपने ऑफिस के कुछ ज़रूरी काम निपटा रहा है, तो आप लोग जितनी पैकिंग हो सकती है, कर लो।

मैंने ज़ायरा से कहा- शीराज को तो ऑफिस में टाइम लगेगा. तो इस दौरान क्यों न हम सारी पैकिंग का काम निपटा लें।
वो बोली- ठीक है।

मैं ज़ायरा के पीछे पीछे उसके बेडरूम में गया जहां मैंने उसके रूम की सभी चीजों को पैक करने में उसकी मदद की।

इस दौरान कई बार जब वो झुकी तो मुझे मस्त मोटे मम्मों के और क्लीवेज के दर्शन भी हुये. मुझे तो लगा जैसे मुझे इस मेहनत का मेहनताना मिल गया हो।

काम के दौरान बातें करते करते मैं भी भाभी जी से ज़ायरा पर आ गया। वो भी मुझे भाई साहब से राज जी कहने लगी।

एक और बात हुई कि पैकिंग करते हुये मैंने जब ज़ायरा ने उनकी अलमारी के सभी कपड़े निकाल कर बेड पर पड़े सूटकेस में रखे तो मैंने देखा, उन में कई बहुत खूबसूरत रंग बिरंगे ब्रा और पैंटीज़ थी। कुछ अंडर शर्टस थी। निकरें, जीन्स, स्कर्टस, साड़ियाँ, ब्लाउज़, सूट बहुत कुछ था।
ज़ायरा ने वो सब अपने सूटकेस में रखे।

मैंने शीराज की बुक्स और बाकी सामान बड़े बड़े गत्ते के डिब्बों में भरा। दीवान खोल कर रजाइयाँ, कंबल चादरें तकिये भी पैक किए। उसके बाद किचन का समान, और स्टोर का समान, और ना जाने क्या क्या हमने पैक किया।

इस दौरान कई बार ज़ायरा के नर्म जिस्म से टकराने और उसे छूने का मौका मिला। मैंने भी इस बात का कोई नोटिस नहीं लिया. उसने भी इन बातों की इगनोर किया।

सुबह 10 बजे मैं आया था और अब दोपहर का 1 बज रहा था। हम दोनों ने खाना खाने और थोड़ा आराम करने का सोचा।

खाना घर में बनाने की बजाये मैं बाज़ार से ही बना बनाया खाना ले आया।

शीराज ने तो शाम को आना था, तो हमने खाना खाया, और उसके बाद मैं और ज़ायरा दोनों बेड पर बैठ कर टीवी देखने लगे।

मोटा मोटा सामान हमने सब पैक कर लिया था। बड़े बड़े बक्से और गट्ठर बांध कर रख दिये थे। टीवी देखते देखते हम दोनों को सुस्ती छाने लगी, और थोड़ी ही देर में मैं तो सो गया।
मुझे नहीं पता चला कि कब ज़ायरा भी सो गई।

करीब घंटे भर बाद मैं जागा। उठ कर देखा तो ज़ायरा मेरे पास ही बेड पर सो रही थी। सोते हुये उसकी कुर्ती थोड़ी सरक गई थी। एक तो, उसका खूबसूरत क्लीवेज बड़े बढ़िया तरीके से दिख रहा था, और दूसरे उसका थोड़ा सा पेट भी दिख रहा था।

मैंने सोचा कि ये मौका बढ़िया है। मैंने झट से अपना फोन निकाला, उसकी सभी आवाज़ें बंद की, और फिर कैमरा ऑन किया और ज़ायरा के क्लीवेज की, उसके कुर्ती से बाहर दिख रहे थोड़े से पेट और कमर की पिक्स खींची, और विडियो भी बनाई क्योंकि ऐसे मौके कहाँ हमेशा मिलते हैं।

कल को मुंबई चली जाएगी, फिर क्या पता दोबारा कभी मिले या न मिले। इस लिए एक याद के तौर पर मैंने उसके अंजाने में उसकी कुछ पिक्स और विडियो बना कर अपने पास रख ली कि कल को अकेले में बैठ कर देखा करूंगा। 

मैंने देखा कि करीब साढ़े तीन बज रहे थे.
तो मैं उठा और पहले बाथरूम गया, और मूतने के बाद किचन में जाकर दो कप चाय बना लाया, और आकर ज़ायरा को जगाया।
"अरे भाई उठ जाओ, बहुत सो ली, लो चाय पी लो।"

ज़ायरा उठी और उठने के बाद उसने सबसे पहले अपने कपड़े ठीक किए, वो थोड़ी शर्मिंदा सी थी कि बेख्याली में मैंने उसके जिस्म की नुमाइश के दीदार कर लिए थे।
मगर मैंने ऐसे ज़ाहिर किया कि कोई बात नहीं यार, थोड़ा बहुत तो चलता है।

वो उठ बैठी, बाथरूम जाकर फ्रेश होकर आई और आकर चाय पीने लगी।
एक चुस्की लेकर बोली- अरे वाह, चाय अच्छी बनाते हो आप!
मैंने कहा- शुक्रिया, मेरी बीवी को भी मेरे हाथ की चाय बहुत पसंद थी।

ज़ायरा बोली- तो आप उनसे बात करो, उनको वापिस ले आओ।
मैंने कहा- मैंने तो बहुत कोशिश की है ज़ायरा. सच कहूँ, मेरा इतना दिल करता है कि वो वापिस आ जाए, मेरे घर को संभाले, मुझे संभाले। मुझे प्यार करे। मगर ना जाने क्यों, कुछ बातें ऐसी हो गई हैं कि वो उन्हें भुला नहीं पा रही है। कोई बात नहीं एक दिन वो समझ जाएगी और ज़रूर वापिस आ जाएगी।

ज़ायरा बोली- और जब तक वो वापिस नहीं आती?
मैंने एक बार तो सोचा कि कह दूँ कि जब तक वो नहीं आती, तब तक तुम हो न। 
मगर मैंने कहा- तब तक इंतज़ार!
ज़ायरा हंस कर बोली- हाँ, मगर इंतज़ार करना सबसे बुरा काम है. मुझे इंतज़ार करना बिल्कुल पसंद नहीं।

मैंने मन में सोचा- अरे यार मुझ से पूछ! तुझसे चोदने के सपने मन में बुन रहा हूँ. और उन सपनों के पूरा होने का इंतज़ार किस शिद्दत से कर रहा हूँ, ये मैं ही जानता हूँ।

कहते हैं कि जब आप किसी इंसान के बारे में कुछ सोचते हो तो हमारी छठी इंद्री हमें बता देती है कि सामने वाला हमारे बारे में क्या सोच रहा है। मैं चाहता था कि किसी तरह ज़ायरा को पता चल जाए कि उसके गदराये, भरपूर जिस्म को देख कर मेरा लंड भी अंगड़ाई पे अंगड़ाई ले रहा है। 

बेशक मेरा लंड पूरी तरह से तना हुआ नहीं था मगर थोड़ा सा भी तन जाए तो पैंट में से दिख जाता है।
और मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ.

जब चाय पीते पीते और ज़ायरा के गदराए बदन को देखते हुये मेरे लौड़े ने अंगड़ाई सी ली, तो ज़ायरा का ध्यान भी मेरी पैंट की तरफ गया और उसने देख लिया के पैंट के अंदर मेरा लंड बल खा रहा है।

मैं जानबूझ कर इस बात से अंजान बना रहा क्योंकि मुझे पता था के ज़ायरा मेरे लंड को देख रही है. मैं जानबूझकर टीवी की ओर देखता रहा और पैंट के अंदर अपने लंड को तुनके मारता रहा.
ताकि वो पैंट के अंदर ही हिलता रहे और ज़ायरा बड़े अच्छे से उसको देख ले. और अगर उसका मन हुआ तो बात कर ले मुझसे।

मगर मुझे पता था कि औरत कभी भी खुद शुरुआत नहीं करती, वो इशारा देती है, और अगर मर्द ने उस इशारे को समझ लिया और मौका संभाल लिया, तो औरत उसको पक्का देगी। और अगर मर्द ने इशारा न समझा तो मर्द का मौका गया।

मैं अब उस इशारे के इंतज़ार में था कि कब ज़ायरा मुझे वो इशारा देती है।

हालांकि इस बात की भी पूरी आशंका था कि शायद वो इशारा मुझे मिले ही न।
हो सकता है कि ज़ायरा ऐसा कुछ सोच ही न रही हो।
हो सकता है कि वो अपने पति के आने का इंतज़ार कर रही हो और पति के आने के डर से वो इशारा मुझे करे ही नहीं।

मगर उम्मीद पर दुनिया कायम है।
मैं भी उम्मीद का दामन पकड़े बैठा था। 


दोस्त की बीवी ने बहाने से चूत चुदाई-2


उसके बाद भी हमने काफी काम निपटाया.

मगर शाम के 7 बजे तक शीराज घर वापिस नहीं आया।
मैंने फिर से शीराज से फोन पर बात करी तो उसने कहा- यार कुछ अकाउंटस क्लियर नहीं हो रहे हैं, उनका हिसाब किताब करने में वक्त लग रहा है।
मैंने पूछा- तो कितना समय लग जाएगा? हमने तो सारी पैकिंग कर ली। अब ये बता कि मैं रुकूँ या जाऊँ?
शीराज बोला- यार तू देख ले, अगर जाना है तो चला जा, बाकी तेरा थैंक्स भाई, जो तूने हमारी इतनी मदद करी। वहाँ मुंबई में भी मेरे रहने का इंतजाम करवा दिया, यहाँ भी मेरे घर के सारी पैकिंग करवा दी।

मैंने फोन काट कर ज़ायरा से कहा- शीराज को तो अभी बहुत वक्त लगेगा। अब यहाँ भी कोई काम नहीं है, मैं सोचता हूँ, मैं निकलूं फिर।
ज़ायरा के चेहरे पर एक हल्का सा उदासी का भाव आया मगर वो बोली- ठीक है, पर एक छोटी से हेल्प और कर दो मेरी।

मैंने कहा- बोलो?
वो बोली- अगर जाने से पहले आप मुझे खाना ही ला दें, शीराज को तो देर लगेगी, क्यों न हम अपना खाना खाकर निपटाएँ, उसके बाद आप चाहो तो घर चले जाना।

अब ये जो उसने कहा 'आप चाहो तो घर चले जाना.'मतलब अगर चाहो तो, न चाहो तो मैं रुक भी सकता हूँ।

इस बात को उसकी तरफ से एक इशारे के रूप में लिया मैंने और बोला- ठीक है, मैं खाना लेकर आता हूँ। खाने के साथ और क्या चलेगा?
मैंने उसे हाथ के इशारे से पेग का पूछा।
वो मुस्कुरा दी- अरे नहीं, ऐसा कुछ नहीं।
मैंने कहा- अरे यार, थकान उतर जाएगी। थोड़ी सी लाता हूँ।

कह कर मैं बिना उसके जवाब का इंतज़ार किए बाहर को आ गया। बाहर आ कर सबसे पहले मैंने ठेके से बेकार्डी के एक अद्धा लिया, दो पैकेट सिगरेट लिए, सोडा, चिल्ली चिकन, और खाना पैक करवा कर मैं वापिस आया।

जब वापिस आया, तो मेरे आने से पहले ही ज़ायरा ने एक मेज पर बर्फ गिलास पानी, नमकीन रखा हुआ था। बगल में एक मोटी सी मोमबत्ती जला दी थी।

मैंने कहा- अरे वाह, तुम तो पहले से ही माहौल बना कर बैठी हो।
वो मुस्कुरा दी।

मैंने दोनों गिलासों में दो पेग बनाए और उसके बाद हमने चीयर्ज करके अपना अपना पेग खींच दिया, पेग से साथ हमें चिल्ली चिकन भी खाया।

फिर मैंने अपने लिए एक सिगरेट सुलगाई और ज़ायरा से पूछा, वो बोली- कभी कभी।
तो मैंने अपनी सिगरेट उसे दे दी और अपने लिए एक और सुलगा ली।

दोनों ने यारों दोस्तो की तरह, खूब सिगरेट फूंकी, बेकार्डी का अद्धा भी गटक गए, सारा चिल्ली चिकन और नमकीन भी बातें करते करते खा गए।

उसके बाद बारी आई खाने की। हालांकि कोई खास नशा नहीं हुआ था, हम दोनों होश में थे, हाँ पर थोड़ा और बेतकल्लुफ़ हो गए थे।

ज़ायरा ने माइक्रो में खाना गर्म किया, हम दोनों ने खाया। उसके बाद हमने सारा ताम झाम समेटा। कमरे में परफ्यूम स्प्रे किया, दारू का अद्धा, सोडे की बोतलें, नमकीन के पैकेट। जूठे बर्तन सबको डिस्पोज़ ऑफ कर दिया।

घर में कोई सबूत ही नहीं छोड़ा के यहाँ किसी ने दारू पी थी, सिगरेटें फूंकी थी। सिर्फ रात के खाने का ही सबूत बाकी थी।

मैं सोच रहा था कि डिनर तो हो गया, अब जाऊँ या रहूँ। अभी तक कुछ भी फाइनल नहीं हुआ था।

मैं बाहर ड्राइंग रूम में बैठा था। ज़ायरा किचन में थी।

तभी धड़ाम की आवाज़ आई, और साथ में ज़ायरा की चीख भी।
मैं झट से भाग कर रसोई में गया, देखा कि फर्श पर ज़ायरा गिरी पड़ी है, पास में ही एक स्टूल भी गिरा पड़ा है, और कुछ समान भी बिखरा पड़ा है।

मैंने पूछा- क्या हुआ ज़ायरा?
वो बोली- अरे कुछ समान ऊपर ही रह गया था, उसे उतारने लगी, तो मैं गिर पड़ी।
तो मैंने कहा- अरे मुझे कह देती, चलो उठो।

मैंने उसे उठाना चाहा, मगर वो दर्द से बिलबिला उठी।
मैंने पूछा- कहाँ लगी?
तो उसने अपनी बाजू और अपनी कमर पर हाथ लगा कर बताया- यहाँ लगी।

मैंने उसे सहारा दे कर उठाया और उसे चला कर उसके बेडरूम में ले गया। किचन से बेडरूम में जाते हुये मुझे लगा कि कहीं यही वो इशारा तो नहीं, जो ये साली जानबूझकर गिरकर मुझे दिखा रही है।
चलो देखते हैं।

मैंने उसे बेड पर लेटाया और फिर उससे पूछ कर ढूंढ कर दर्द वाली क्रीम लेकर आया. मैंने उसकी बाजू पर वोलीनी लगाई। हालांकि कोई सूजन नहीं थी।
फिर मैंने उससे पूछा- कमर पर कहाँ लगी? वहाँ भी लगा दूँ।

तो उसने अपनी कमर पर छू कर बताया.
मैंने कहा- ऐसे तो नहीं लगेगी, तुम उल्टा हो कर लेट जाओ।

वो बड़े आराम से घूम कर उल्टी होकर लेट गई। मैं समझ गया कि साली सब ड्रामा कर रही है। मैंने उसकी कुर्ती ऊपर को उठाई, और बड़े हल्के हाथों से उसकी पीठ पर वोलीनी लगाई।

फिर उसकी रीड की हड्डी पर हाथ लगा कर पूछा- अब बताओ दर्द कहाँ है?
उसने नीचे को इशारा किया।

मैं अपनी उँगलियों से छूता हुआ नीचे को बढ़ा, और जो जगह उसने बताई वो उसकी जीन्स की बेल्ट के नीचे थी।
मैंने कहा- अरे यहाँ तो दवा नहीं लगेगी, थोड़ी जीन्स ढीली करनी पड़ेगी। उसने अपनी जीन्स का बटन खोला और थोड़ी सी ज़िप खोल कर जीन्स ढीली कर दी.

तो मैंने उसकी कमर के दोनों तरफ से उसकी जीन्स पकड़ कर नीचे को सरका दी और उसकी कुर्ती ऊपर उसके ब्रा के स्ट्रैप तक उपर उठा दी।

अब उसकी गोरी, और चिकनी, मांसल कमर मेरी आँखों के सामने थी। मैंने उसकी जीन्स नीचे करी और और उसकी चड्डी भी थोड़ी से सरकाई, ताकि उसके चूतड़ों की रेखा भी दिख जाए। फिर मैंने उसकी कमर पर दवा लगाई। 
दवा क्या लगाई, मैंने भर भर के उसकी कमर को अपने हाथों में भर भर के मसला।

वो चुपचाप अपना मुँह तकिये में दबाये लेटी थी।

अब जब उसकी तरफ से कोई प्रतिरोध नहीं था, तो मेरा भी हौंसला बढ़ता जा रहा था। मैंने हिम्मत करके उसकी कुर्ती और ऊपर को सरकाई और फिर बिना उस से पूछे ही उसकी ब्रा की हुक खोल दी।
ब्रा खुली तो उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया. मैंने उसकी सारी पीठ की ही मालिश शुरू कर दी।

मैंने अपने जूते खोले और फिर उसकी जांघों पर ही चढ़ बैठा और उसकी पीठ की मालिश करते करते अपने लंड को भी उसकी गांड से रगड़ने लगा।
हर बार कोशिश करता के मेरा लंड उसकी गांड के छेद से टकराए। वो भी मस्त हुई नीचे लेटी रही।

मैंने पूछा- ज़ायरा, और भी मालिश कर दूँ? अगर कहो तो, टाँगो की भी मालिश कर दूँ?
उसने तकिये में मुँह दबे ही अंदर से कुछ 'ऊँ... ऊँ...; सी करी।
पता नहीं हाँ बोली या न बोली।

मैंने तो उसकी जीन्स और चड्डी पकड़ी और नीचे की और सरका दी। 

बेशक मैं थोड़ा डर रहा था, मगर जब उसके दोनों गोल गोल चूतड़ बाहर आ गए, तो फिर तो मैंने उसकी सारी जीन्स ही उतार दी। मेरे सामने मेरे दोस्त की बीवी उल्टी होकर नंगी लेटी थी। 
मैंने भी अपने कपड़े खोले, और मैं तो बिल्कुल ही नंगा हो गया। लंड मेरा पूरा नाग बना फुंकार रहा था।

मैं फिर से उसके पांव के ऊपर बैठ, उसके दोनों चूतड़ खोले. आह! अंदर हल्के भूरे रंग का गांड का छेद।

मैंने तो उसकी गांड के छेद को ही चाट लिया, उसने अपने चूतड़ भींच लिए। मतलब उसे सब होश थी और उसको मज़ा भी आ रहा था।

मैं उसकी गांड चाटता हुआ नीचे को गया और उसकी दोनों टाँगें खोल कर, उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा।

चूत तो उसकी पहले से ही गीली हो रही थी। मैं जितना हो सकता था, उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ घुसने की कोशिश कर रहा था, मगर उसके उल्टा लेटे होने की वजह से मुझे दिक्कत आ रही थी।
तो मैंने उसके दोनों पांव पकड़े और खींच कर उसे बेड के बीच में किया. फिर उसकी बगल में लेट कर मैंने उसकी कमर ऊपर को उठाई, और अपनी बांहों में भर कर उसकी कमर अपने मुँह पर ही रख लिया.
अब मैं उसके नीचे आ गया, और उसे मैंने अपने ऊपर लेटा लिया।

वो ऐसे ज़ाहिर कर रही थी जैसे उसे शराब का नशा हो।

मगर मैं अब खुल कर सामने आ गया था। मैंने उसकी दोनों टाँगें खोल कर उसकी चूत से मुँह लगा लिया। 

थोड़े थोड़े बाल थे उसकी चूत पर! मगर जब भोंसड़ी मारने की तलब लगी, तो फिर तो कितने भी बाल हो, कोई दिक्कत नहीं होती।

मैंने उसकी चूत की दोनों फाँकें खोल कर अपना मुँह ही उसकी चूत से सटा लिया और अंदर तक जीभ डाल कर उसकी चूत को चाटने लगा। कभी उसकी चूत के होंठों को अपने होंठों से चूसता, कभी उसकी चूत के दाने को अपने होंठों में लेकर चूसता।

बेशक वो नशे का बहाना कर रही थी मगर इसके बावजूद वो तड़प रही थी। अपनी टाँगें हिला रही थी, अपनी जांघें भींच रही थी।

और फिर मुझे एक कोमल एहसास हुआ। उसने मेरा लंड पकड़ा और अपने मुँह में ले लिया। उसके लबों की नर्मी ने मेरे लंड को ऐसे सहलाया कि मेरे बदन खून की गर्मी बढ़ गई।

अब तो सब साफ था, मैं तो उसकी चूत चाट ही रहा था, मगर अब तो वो भी मेरे लंड को पागलों की तरह चूस रही थी।
मेरे लंड को चूसने की उसकी तेज़ी बताती थी कि बहुत जल्द उसका पानी छूटने वाला है।
और वही हुआ।
कुछ ही पलों बाद उसने तो जैसे मेरे सारे लंड को ही निगल लिया हो।

अपने दोनों हाथों के नाखून उसने मेरी जांघों में गड़ा दिये और अपने दाँत से मेरे लंड को काट खाया। मैंने भी उसकी चूत के दाने को दाँतों से काट लिया और अपने मुँह में अंदर तक खींच कर उसकी चूत के दाने को जीभ से दनदनाने लगा।

मेरे मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकली, मगर ज़ायरा मेरे लंड को चूसते हुये ऊँ ... ऊँ ... ऊँ करती रही।

जब उसकी पकड़ थोड़ी ढीली पड़ी, तो उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाल दिया, तो मैंने बिना कोई देरी किए, उसको उल्टी से सीधी किया, और उसकी दोनों जांघें खोल कर अपना लाँड़ा उसकी चूत पर रखा और अंदर धकेल दिया।
वो बोली- अब कहे की जल्दी, घबराओ मत, आराम से करो।

मैंने उसकी कुर्ती उतारी और साथ में ब्रा भी खोल दी। खूबसूरत मोटे गोल मम्मों से खूब खेला मैं। खूब दबाये, खूब चूसे।

उसने बार बार खुद अपने मम्मे मेरे मुँह में दिये- चूसो इन्हे राज। मुझे मम्मे चुसवा कर बहुत मज़ा आता है।
मैंने भी ऐसे चूसे उसके मम्मे जैसे कोई भूखा बच्चा हो।

अपनी बांहों में ज़ायरा को जकड़ कर कहा- आज तो मेरी किस्मत चमक गई, बहुत बरसों से मेरे मन में चाहत थी तुझे चोदने की, आज मेरी मन्नत पूरी हुई।
ज़ायरा बोली- अरे मेरे पति को पता था कि तुम्हारा बीवियों की अदला बदली वाला क्लब है। वो चाहते भी थे कि तुम उनसे बात करते, और ये तो वैसे भी तुम्हारी बीवी को पसंद करते थे। अगर तुम बात कर लेते तो तुम्हारी ये चाहत कब की पूरी हो जाती। मगर तुमने बात ही नहीं करी।

मैंने कहा- मैंने तो कई बार सोचा, तुम्हारे बारे में। मगर पता नहीं क्यों, मैं तुम तक पहुँच ही नहीं पाया। चलो कोई बात नहीं। तब नहीं तो अब सही।
ज़ायरा बोली- वो तो ठीक है यार, मगर मेरी एक इच्छा थी कि मैं बहुत सारे लोगों के सामने सेक्स करूँ और वो भी किसी गैर मर्द से, और सब आस पास बैठ कर मुझे देखें। अगर तुम पहले मुझे मिलते तो तुम्हारे क्लब में मेरी ये हसरत पूरी हो जाती।

मैंने कहा- यार, मैं कोशिश कर रहा हूँ, अगर फिर से मैं नया क्लब बना लूँ। अगर बन गया तो क्या तुम मेरा क्लब जॉइन करोगी?
वो बोली- अरे मैं तो तैयार हूँ मेरे यारा! तू बना तो सही।

मैं खुश हो गया और दबादब अपने ख़ास दोस्त की बीवी ज़ायरा को चोदने लगा। खूब प्यार से उसके सारे जिस्म को सहला सहला कर, चूस चूस कर मैंने ज़ायरा को चोदा। हमने खूब एक दूसरे के होंठ जीभ चूसे।

फिर मैंने उसे अपने ऊपर लिया और फिर ज़ायरा ने मुझे चोदा।
मज़ा आ गया ज़िंदगी का।
वो ऊपर कमर हिलाती रही और मैं नीचे लेटा उसके भारी मम्मों से खेलता रहा, उन्हें चूसता रहा।

फिर मेरा भी पानी गिर गया। ज़ायरा के चूत के अंदर ही मैंने पिचकारी मार दी।
ज़ायरा मेरे ऊपर ही लेट गई।

कुछ देर वैसे ही हम संभोग के नशे में लेटे रहे। फिर संयत होकर अपने अपने कपड़े पहन कर ठीक ठाक हो कर बैठ गए।
मैंने कहा- शीराज काफी लेट हो गया।
ज़ायरा बोली- हाँ उसने कहा था कि रात के 12-1 तो उसे बज ही जाएगा।
मैंने कहा- तो तुम्हें पता था के शीराज लेट आएगा, इसी लिए तुम्हें किचन में गिरने का बहाना किया।
वो हंस कर बोली- हाँ।

मैंने कहा- और अगर इस दौरान शीराज आ जाता तो?
वो बोली- तो क्या ... हमारे बीच ऐसा कोई पर्दा नहीं। मैं उसे कह देती कि मेरा दिल किया सेक्स को और मैंने सेक्स कर लिया।
मैंने हैरान हो कर पूछा- बस ऐसे ही? और वो मान जाता?
ज़ायरा बोली- हाँ, इतनी अंडरस्टेंडिंग है हम में।

मैंने कहा- तो अब क्या?
वो बोली- अगर तुम्हारा दिल मुझे और चोदने का है तो रात को रुक जाओ। हाँ अगर तुम्हारा औज़ार दोबारा तैयार नहीं हो सकता तो अपने घर भी जा सकते हो।
मैंने कहा- औज़ार तो मेरे हुकुम का गुलाम है, ये तो अभी खड़ा हो जाएगा।
ज़ायरा बोली- तो फिर दो इसे हुकुम, अभी तो साढ़े 10 बजे हैं, 12 भी तो बजाने है।

मैं उठा और फिर से अपनी पैंट खोलने लगा। वो फिर से नंगी होकर डॉगी स्टाईल में बैठ गयी अपना लंड पीछे से उसकी चूत पर सेट किया आराम से उसकी चूत में अपना लंड घुसाने लगा।
इस बार एक बार में ही ज़ोर लगा कर अपना पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया उसे बहुत जोर से दर्द हुआ क्योंकि अभी उसकी चूत सूखी थी। मगर थोड़ी सी ही देर में उसकी चूत ने पानी छोडना शुरू कर दिया।

इस पोजीशन में मेरा लंड बड़ा कस कर अंदर बाहर आ जा रहा था, बड़ी टाइट लग रही थी, उसकी चूत। वो भी मज़े मे- आह आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह आह कर रही थी।
पहले तो ये आह आह हल्की थी मगर जल्द ही ये सिसकारियाँ उसके चिल्लाने में बदल गई.
और वो पूरी वाइल्ड होकर बोली- मुझे चोदो फाड़ दो मेरी चूत!

मैं भी पूरे जोश में अपने दोस्त की बीवी को चोदने लगा। कभी मैं ज़ोर लगाता, कभी वो अपनी कमर आगे पीछे करती। दोनों के दोनों अब सिर्फ यही चाहते थे कि ये चुदाई खत्म ही न हो।

मगर हर शुरू हुये काम को कभी तो खत्म होना ही पड़ता है, तो 25 मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया.

जैसे ही मेरा पानी निकाला, ज़ायरा एकदम पलटी और उसने अपनी चूत से मेरा लंड निकाला, अपने मुँह में ले लिया और लगी चूसने।
मेरा बहुत सारा माल भी वो पी गई, मेरे लंड से चाट गई।

चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ बाथरूम में गए, हम दोनों ने एक दूसरे को बांहों में भरे हुये ही पेशाब किया। उसके पेशाब से मेरी सारी टाँगें भीग गई और मेरे मूत से उसकी टाँगें भीग गई।

फिर ज़ायरा ने खुद अपने हाथों से मेरा लंड धोया और मेरी टाँगें साफ करी। फिर अपने को साफ किया।

फिर हमने अपने कपड़े पहने और मेरा दूध गर्म करके लाई।

अभी दूध टेबल पर रखा ही था, तभी बाहर किसी ने गेट पर बेल बजायी।

बेशक हम दोनों बिल्कुल सही हालत में थे, मगर फिर भी मेरी तो गांड फट गई.
लेकिन ज़ायरा ने बडी समझदारी से अपने पति को गेट पर ही रोक लिया और किस करना शुरू कर दिया और बहुत प्यार जताती हुई, उसे अंदर ले कर आई।

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