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मौसी और अकटारा को चोदा – देसी कहानी

जिगोलो की कामुक दुविधा

जिगोलो की कामुक दुविधा-1


मेरा नाम जमील है और मैं करनाल में रहता हूँ, एक 27 साल का गोरा चिट्टा नौजवान हूँ। रेगुलर जिम जाता हूँ, अच्छी बॉडी बना रखी है।
दरअसल मैं जिस काम में हूँ, उस काम में आपका खूबसूरत और सेहतमंद होना बहुत ही ज़रूरी है। मैं एक जिगोलो हूँ। जिगोलो बहुत से लोग तो जानते होंगे, जो नहीं जानते वो मैं बता देता हूँ। मैं एक पुरुष वेश्या हूँ। अब समझे।

मान लो आपकी बीवी को आप संतुष्ट नहीं कर पाते, वो बिस्तर पर प्यासी रह जाती है। तो आप या वो अगर चाहे तो मैं उसको बिस्तर में खुश कर सकता हूँ। हाँ इस काम के लिए मैं पैसे लेता हूँ। एक रात के 15000 रूपये। 

ये तो हुई मेरी बात। अब आप पूछेंगे कि भाई इस काम में कैसे आ गए।
दरअसल हुआ यूं कि कॉलेज के दिनों में ही मेरी एक आंटी से सेटिंग हो गई थी। अब मैं सिर्फ 22 साल का और वो थी शायद 45-46 साल की। मेरी मम्मी जैसी, मगर उस उम्र में तो सिर्फ चूत ही दिखती है, तो जैसे ही मेरी सेटिंग हुई, मैंने बिना कोई समय गँवाए, पहली फुर्सत में उस आंटी को चोद दिया।

शायद नई नई चढ़ी जवानी के जोश में मैंने उसके पति से बेहतर काम किया तो उस आंटी ने मुझे पक्का ही अपना चोदू रख लिया। अब मैं अपने शहर से दूर पीजी रह कर पढ़ रहा था, तो मुझे दिन में या रात में कभी भी आने जाने की दिक्कत नहीं होती थी, तो मैंने उस आंटी को खूब पेला, सारी सारी रात मैं उसके बदन से खेलता, पहली बार ज़िंदगी में औरत के जिस्म से खेलने को मिला था।

जिस दिन मैं रात को आंटी के घर रहता, उस रात मैं उसे हमेशा दो तीन बार चोदता। आंटी की खूब तसल्ली होती। सुबह जब वापिस आता तो आने पहले से आंटी कुछ पैसे दे देती। मेरी जेब खर्च मिल जाती।

फिर एक बार आंटी की ननद आई हुई थी तो आंटी ने मुझे उससे भी सेक्स करने को कहा। मगर वो काली कलूटी बदशकल सी औरत मुझे पसंद नहीं आई.
तो आंटी ने मुझे ज़्यादा पैसे का लालच दिया।
उस दिन पहली बार मैंने 1000 रुपये लेकर उस बदशकल औरत को चोदा। 

मगर बाद में मुझे ये ख्याल आया कि यार ये तो अच्छा काम है, चुदाई भी करो, और पैसे भी कमाओ।

उसके बाद मैंने आंटी को कहा- यार अगर तुम्हारी और भी कोई दोस्त रिश्तेदार हो, और वो मुझसे चुदवाना चाहें तो मुझे बता देना, 1500 रुपये में फुल सेटिस्फेकशन।
आंटी ने मुझे एक दो ग्राहक दी मगर वो भी आंटियाँ ही थी।

मेरे दिल में था कि मैं नौजवान लड़कियों को, ताज़ी ताज़ी शादी हुई भाभियों को भी अपनी सर्विस दूँ। मगर दिक्कत ये थी कि कुँवारी लड़कियों के बॉयफ्रेंड होते थे और नई नई शादी हुई लड़कियों के पति होते थे.
तो मुझे मिलती थी 40 साल से ऊपर की आंटियाँ, लटके हुये मम्मे, बढ़े हुये पेट, लटकी हुई फुद्दियाँ।

साली जवान खूबसूरत लड़कियों औरतों को चोदने का मौका ही नहीं मिल रहा था।

लेकिन जितनी भी आंटियों को मैं चोदता था, उन सबसे कहता था कि आंटी जी अगर आपकी बेटी, बहू और कोई रिश्तेदार भी मेरी सर्विस चाहती हैं, तो उनको भी मेरा मोबाइल नंबर दे देना।

देखने वाली बात ये थी कि अगर मैं किसी आंटी को किसी और जगह पूछता कि आंटी आपकी बेटी या बहू को मैं चोदना चाहता हूँ, तो शायद वो मुझसे लड़ पड़ती, मुझे गालियां देती, मुझे मार भी देती।
मगर यहाँ जब वो खुद अपना भोंसड़ा खोल कर पड़ी होती थी, तो बड़े प्यार से कह देती- कोई बात नहीं यार ... अगर हुई तो बता दूँगी।

हालांकि अभी तक मुझे किसी ने भी नहीं बताया था। मैं तो सिर्फ इंतज़ार करता कि किसी आंटी की जवान और खूबसूरत बेटी या बहू हो 20 की, 25 की, बस उसकी चूत मार कर तो मज़ा ही आ जाए।

एक दिन मुझे किसी का फोन आया- हैलो जमील?
मैंने कहा- हां जी, जमील बोल रहा हूँ, आप कौन?

उधर से आवाज़ आई- मैं दिल्ली से सीमा बोल रही हूँ। आपका नंबर मुझे मेरी किसी जानकार ने दिया है। उन्होंने कभी आपकी सर्विस ली थी और यकीनन आपसे बहुत खुश हुई. तो उन्होंने मुझे भी कहा।

मैं समझ तो गया, पर इतनी जल्दी मैं किसी से खुल कर बात नहीं करता।
मैंने कहा- किन की बात कर रही हैं आप?
वो बोली- करनाल में मेरी बुआ जी रहती है सरला! उन्होंने मुझे आपका नंबर दिया।

फिर मैंने याद किया तो पहचाना- अच्छा अच्छा, सरला मैडम, वो *** कालोनी वाली ... वो तो कई बार मिली हैं मुझसे।
उधर से आवाज़ आई- तो क्या हम थोड़ा खुल कर बात कर सकते हैं?
मैंने कहा- जी कहिए, आपकी क्या सेवा मैं कर सकता हूँ?

उधर से सीमा बोली- बात दरअसल यह है कि मेरी एक सहेली है, मेरे पड़ोस में ही रहती है। मगर वो अपने पति से खुश नहीं है। तो इस लिए मैं अपनी सहेली के लिए आपकी सेवाएँ लेना चाहती हूँ।
मैंने कहा- आप अपने लिए भी मेरी सेवाएँ ले सकती हैं।
सीमा पहले तो हंसी फिर बोली- जी नहीं शुक्रिया, अभी मेरे पति से मैं खुश हूँ, हाँ अगर कभी जरूरत पड़ी तो आपका नंबर है मेरे पास, मैं आपको ज़रूर याद करूंगी।
मैंने कहा- मैं उस वक्त का इंतज़ार करूंगा। खैर आपकी ये फ्रेंड कौन है और कहाँ रहती है, मेरी उनसे बात करवा दीजिये, ताकि मैं सारी डिटेल उनको बता सकूँ।

सीमा बोली- वो पर्दे वाले घर में रहती है, बड़ी मुश्किल से घर से बाहर आ पाती है इसलिए आप जो भी बताना चाहते हैं, मुझे बता दीजिये, मैं आपकी पेमेंट भी कर दूँगी और आपको बता भी दूँगी कि कब कहाँ आप उससे मिल सकते हैं।
मैंने कहा- ठीक है, मुझे तो पैसे से मतलब है। बस ये बता दीजिये के उसकी उम्र क्या होगी और देखने में कैसी है?
सीमा बोली- देखने बहुत सुंदर है, गोरी है, पतली है, बाकी जिस्म भी भरा हुआ है, उम्र यही कोई 24-25 साल की होगी। बाकी आप मिल कर देख लेना।

मैं तो सुन कर झूम उठा कि अरे वाह ... क्या मस्त माल मिलने वाला है।

मैंने सीमा को अपने काम के सारे रेट और शर्ते समझा दी।

दो दिन बाद फिर सीमा का फोन आया और उसने मुझे फुल पेमेंट अड्वान्स में कर दी और बताया कि ठीक तीन दिन बाद मुझे दिल्ली के एक होटल के कमरा नंबर 227 में जाना है।

अब क्योंकि समय दिन का था और मुझे करीब 1 बजे तक उस होटल में पहुँचना था तो मैं अपनी पूरी तैयारी के साथ घर से निकला और ठीक साढ़े बारह बजे बताए गए होटल में पहुँच गया और सीमा को फों करके बता दिया कि मैं होटल पहुँच गया हूँ।

कुछ देर बाद मुझे फोन आया- आप ऊपर रूम नंबर 227 में पहुँच जाओ, कस्टमर वहीं है।
मैं उठ कर रूम नंबर 227 पर पहुंचा और दरवाजा खटखटाया.
अंदर से आवाज़ आई- खुला है, आ जाओ।

मैं अंदर घुसा और अंदर घुसते ही मेरे होश उड़ गए, और सिर्फ मेरे ही नहीं, मेरी जो कस्टमर मेरे सामने खड़ी थी, वो भी एकदम से मुझे देख कर घबरा गई।
जानते हो वो लड़की कौन थी, मेरी अपनी प्यारी से छोटी बहन गज़ल।
मैंने बड़े हैरान हो कर पूछा- गुज्जू, तू यहाँ?

वो पहले तो अपना चेहरे छुपा रही थी, मगर अब जब पहचान ही हो गई तो अपने चेहरे से अपनी साड़ी का पल्लू हटा कर बोली- भाई आप यहाँ कैसे?
अब और किसी बात की तो गुंजाइश ही नहीं बची थी. मैं एक जिगोलो के रूप में आया था और मेरी ही सगी छोटी बहन मेरी कस्टमर थी।
मुझे इस बात पर शर्म, गुस्सा, हैरानी सब कुछ आया।

अभी दो साल पहले ही तो मैंने अपने हाथों से अपनी गुज्जू की शादी की थी. तो ऐसा क्या हुआ कि सिर्फ दो साल के शादीशुदा जीवन में ही गुज्जू को शादी से बाहर किसी जिगोलो की ज़रूरत पड़ गई।
मैंने फिर पूछा- तू यहाँ कैसे?
वो बोली- जिस काम के लिए आप यहाँ आए हैं।

मैं उसे लेकर बेड पर बैठ गया. अब अगर मेरी बहन को पता चल ही गया कि मैं एक जिगोलो हूँ, तो अब क्या कर सकते हैं।
मैंने पूछा- मैं तो समझता था कि तेरी शादीशुदा ज़िंदगी बड़े सुकून से चल रही है, फिर ये क्या ज़रूरत आ पड़ी?

वो बोली- भाईजान, मेरी शादीशुदा ज़िंदगी तो कभी भी पुरसकूँ नहीं रही। जब से शादी हुई है, मैं अपने शौहर से कभी भी खुश नहीं रह सकी। उसमें वो दमखम ही नहीं कि वो किसी औरत को खुश कर सके। इसी लिए मैंने तो बड़े डरते डरते, बहुत सोच समझ कर ये कदम उठाया था कि किसी को पता भी न चले और मैं अपने पति को सिर्फ एक बच्चा दे सकूँ, ताकि उसकी भी इज्ज़त बची रहे और मेरा भी घर भर जाए. मगर मुझे क्या पता था कि मेरी किस्मत इतनी बेदर्द निकलेगी।
और वो रोने लगी।

मैंने अपनी बहन को अपनी आगोश में लिया और उसे बहुत समझाया- अरे पगली रो मत, तू ऐसा कर ... कासिम को मेरे पास भेज! मेरे एक दो जानकार हैं जो बहुत बढ़िया इलाज करते हैं। चिंता मत कर ... तेरी गोद जल्द ही भर जाएगी।
वो रोते रोते बोली- नहीं भाईजान, ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि कासिम आज भी किसी बच्चे जैसे ही हैं, उनके पास ऐसा कुछ नहीं है, जो मुझे माँ बना सके।

अब बहन ने इशारे इशारे में बता दिया कि उसके पति की लुल्ली छोटी सी है, जिस से वो संतुष्ट नहीं है। 

मैंने उसे कहा- तो क्या हुआ, सब कुछ हो जाता है, मैं बात करूंगा अपने जानने वालों से, इसका भी कोई न कोई हल निकल आएगा।
मगर गुज्जू बोली- कोई हल नहीं निकलेगा भाईजान, ये पिछले 3-4 साल से अपना इलाज करवा रहे हैं मगर सब बेकार। इसी लिए मैंने चोरी छुपे ये प्लान बनाया था, मगर आप प्लीज़ किसी को बताना मत।
मैंने कहा- अरे पागल है क्या, मैं अपनी बहन का राज़ किसी को क्यों बताने लगा?
जबकि असल बात तो ये थी कि मेरा अपना राज़ भी तो मेरे बहन के सामने नंगा हो चुका था।

फिर गुज्जू बोली- मगर भाई आप इस काम में कैसे आ गए?
मैंने कहा- अब तुमसे क्या छुपाना ... मैं जहां पीजी में रहता था वहां की पड़ोस वाली एक आंटी मुझे इस काम में ले आई। पहले खुद अपने लिए मुझे बहका के पटा लिया, बाद अपनी सहेलियों के पास भी भेजने लगी। और जब चार पैसे बनने लगे तो मुझे भी लालच हो गया, और मैं इस धंधे में आ गया।

फिर गुज्जू बोली- अब क्या करोगे?
मैंने कहा- करना क्या है, दोनों चुपचाप एक दूसरे का राज़ अपने दिल में दफन करके अपने अपने घर चलते हैं।

गुज्जू बोली- अरे मैं ये नहीं पूछ रही, मैं पूछ रही हूँ, अब जब हम दोनों का राज़ एक दूसरे पर खुल चुका है तो तुम अब क्या करोगे? जिस काम के पैसे लिए हैं, वो काम करोगे या नहीं?

कहानी जारी रहेगी.


जिगोलो की कामुक दुविधा-2

मैं सोचने लगा कि 'अरे मैं तो समझा था कि ये घर जाएगी, मगर ये तो वो सब करने को तैयार थी, जो किसी भी भाई बहन के बीच होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

कुछ कहता मैं ... इससे पहले ही वो बोली- तुमने जिस काम के पैसे लिए हैं, वो काम तो पूरा करके जाओ।
मैंने कहा- गुज्जू, मैं तुम्हारा भाई हूँ, ऐसे कैसे कर सकता हूँ? मैं तुम्हारे पैसे वापिस कर दूँगा।
वो बोली- तो लाओ मेरे पैसे।
मैंने कहा- वो तो अभी नहीं हैं।
वो बोली- तो फिर अपना काम पूरा करो।

मैं समझ नहीं पाया कि औरत का किरदार क्या होता है. अभी ये मेरे सामने रो रही थी और अब मुझसे चुदवाना चाहती है। अभी मेरी बहन थी और अब मेरी कस्टमर है।
उसको कैसा महसूस हो रहा था, मुझे नहीं पता, मगर मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था।

मैं कुछ कहता ... इससे पहले ही वो मुझसे लिपट गई- अब ये भाई बहन का नाटक बंद करो; मुझे एक कस्टमर की तरह ट्रीट करो और अपनी बेस्ट सर्विस मुझे दो; बिना कोई सवाल पूछे।
मैं क्या कहूँ, जब वो मुझे लिपटी तो उसके नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे।

हार्ड कप वाले ब्रा पहने होने की वजह से बड़े सॉलिड से मम्मे लगे।

मैं अभी सोच ही रहा था कि मेरे चेहरे पर अपनी उंगली घूमती हुई वो बोली- अब कोई लिहाज मत करो, जो औरों के साथ करते हो, मेरे साथ भी करो, मैं अब यहाँ आई हूँ, तो अपने घर परिवार, समाज के सभी बंधन तोड़ कर आई हूँ। अपनी, अपने मायके की, अपने ससुराल की इज्ज़त दांव पर लगा कर आई हूँ। अब अपनी सारी ज़िंदगी, मान मर्यादा रिस्क पर लगा कर मैं यहाँ से खाली नहीं मुड़ सकती। अगर खाली गई तो सारी उम्र मलाल रहेगा कि जब सब कुछ कर सकती थी, तो कुछ भी न कर सकी। और अब तो बात भी हम दोनों के बीच है, कभी भी किसी को भी पता नहीं चलेगा। सब कुछ पर्दे में छुपछुपा कर हो जाएगा।

जिस बहन को मैं बहुत ही भोली, मासूम समझता था, वो तो एकदम चालाक निकली।
मैंने उसे अपने से दूर किया और पूछा- क्या तुम्हें सच इस बात की कोई शर्म नहीं की तुम अपने भाई से ये बातें कर रही हो और अपने भाई से ही सेक्स भी करना चाहती हो?

वो बोली- किस बात की शर्म, अगर तुम्हारी जगह कोई और होता तो शायद अब तक हम वो सब कुछ कर भी चुके होते, और तुम में क्या कमी है। मेरे भाई हो तो क्या हुआ, बल्कि अच्छा है, मैं तुम्हें जानती हूँ, तुम्हें प्यार करती हूँ। और ये भी पता है कि अगर तुमसे मैं प्रेग्नेंट हो भी गई तो अच्छा है न, मेरा भाई ही मेरे बच्चे का बाप होगा, हमारे ही खानदान का चिराग बनेगा वो।

मैं तो अपनी बहन की बातें सुन सुन कर हैरान हो रहा था। 

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